SC के पूर्व जज ने योग दिवस को बताया नौटंकी, कहा- जिनके पास रोटी नहीं, उनसे यह केक खाने को कहने जैसा

0
69

भारत में लोग योग नहीं बल्कि भोजन, नौकरी, आश्रय, उचित स्वास्थ्य देखभाल, अच्छी शिक्षा और अन्य आवश्यकताएं चाहते हैं। किसी भूखे या बेरोजगार पुरुष/महिला को योग करने के लिए कहना एक क्रूर चाल और भटकाव है।
जस्टिस (रि.) मार्कण्‍डेेय काट्जू ने कहा कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है। मैं इसे एक नौटंकी और नाटक मानता हूं। जब 50% भारतीय बच्चे कुपोषित हैं (ग्लोबल हंगर इंडेक्स देखें), हमारी 50% महिलाएं एनीमिक हैं और रिकॉर्ड बेरोजगारी है।
खाद्य पदार्थों, ईंधन, गैस सिलेंडर आदि की आसमान छूती कीमतें, किसानों का संकट (लगभग 400,000 भारतीय किसानों ने पिछले 25 वर्षों में आत्महत्या की है) और जनता के लिए उचित स्वास्थ्य सेवा लगभग नगण्य है। इस परिस्थिति में लोगों को योग करने के लिए कहना उतना ही बेतुका और बेहूदा है, जितना कि क्वीन मैरी एंटोनेट का उन लोगों, जिनके पास रोटी नहीं थी, से कहना कि वह केक खाएंI

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here