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हुनरमंदों के लिए सिनेमा में अपार संभावनाएं: फिल्म अभिनेता आदित्य ’ओम’

लखनऊ 6 मार्च 2020 शिया पी.जी. कालेज के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में आज ’फिल्म मेकिंग एवं एक्टिंग’ विषय पर विशेष व्याख्यान एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें ‘शूद्र’ फेम फिल्म अभिनेता एवं निर्देशक आदित्य ’ओम; बतौर विशेषज्ञ शामिल हुए। अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके अभिनेता ओम ने फिल्म के निर्माण के विभिन्न सूक्ष्म पहलुओं से छात्रों को अवगत कराते हुए रोजगार की संभावनाओं के बारे में चर्चा की।
बालीवुड और दक्षिण की 30 से अधिक फिल्मों में अभिनय और निर्देशन कर चुके फिल्म स्टार आदित्य ‘ओम’ ने कहा कि वर्तमान में मीडिया और सिनेमा दोनों में अपार संभावनाएं हैं। पहले लोगों को इस फील्ड में अपना हुनर दिखाने के लिए अवसर नहीं मिल पाता था, लेकिन अब सोशल मीडिया और यू-ट्यूब जैसे प्लेटफार्म पर अपनी एक्टिंग के दम पर कोई भी रातो-रात स्टार बन सकता है। कैमरा और एडिटिंग के भी बहुत से ‘ऐप’ आ जाने से अच्छे से अच्छे फिल्मों का निर्माण किया जा सकता है। अब किसी को बालीवुड और टालीवुड के चक्कर लगाने की जगह यू-ट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्म से ज्यादा प्रसिद्धि और अवसर मिल रहे हैं। श्री ओम ने कहा कि किसी कलाकार के लिए सफलताएं या काम मिलने से ज्यादा उसे बरकरार रखने की जरूरत रहती है। उन्होंने छात्रों को मीडिया और फिल्म जगत में स्थापित होने के लिए खास टिप्स भी बताये और छात्रों की फिल्म निर्माण संबंधी विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान किया। श्री ओम ने अपने जीवन संघर्षों के दिलचस्प पहलुओं को छात्रों से साझा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह से विशुद्ध हिन्दी पट्टी के क्षेत्र यूपी के सुलतानपुर से दक्षिण के फिल्मों में स्टार बनने की राह तैयार की। वर्तमान में वह अपनी निर्माणाधीन नई फिल्म ‘शूद्र-2’ के शूटिंग के सिलसिले में लखनऊ में आये हुए हैं।
मौलाना यासूब अब्बास, सिक्रेटरी मजलिसे उलेमा ने कहा कि शिया पीजी कालेज के पत्रकारिता विभाग में राजधानी के सबसे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस प्रोडक्शन स्टूडियो का निर्माण कराया है। हमारा प्रयास है कि छात्रों के शिक्षण कार्य में सुविधाओं की कमी आड़े न आने पाये, बस जरूरत इतनी है कि छात्र भी सकारात्मक परिणाम दें।
कार्यक्रम का संचालन विभाग कोआर्डिनेटर डाॅ. प्रदीप शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि छात्रों को शिक्षा सही अर्थ तभी हासिल हो सकेगा, जब उसका समाज में सदुपयोग हो। व्याख्यान एवं परिचर्चा में डाॅ. सरवत तकी, डाॅ. तरूणकांत त्रिपाठी, डाॅ. राहुल पाण्डेय, डाॅ. अरमान तकवी, डाॅ. योगेन्द्र पाण्डेय, डाॅ. राबिन वर्मा, राजकुमार सैनी समेत विभाग के छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया।

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