बारगाहे सानिये जहरा स.अ, पुराना तोपख़ाना बालागंज में दो रोजा मजालिस का ऐनेक़ाद।

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शाह विहार कॉलोनी पुराना तोपखाना बालागंज स्थित इमाम बारगाह सानिया ज़हरा सलवातुल्लाह अलैहा में ब- सिलसिला ए शहादते इमाम मोहम्मद बाकिर अलैहिस्सलाम और बसिलसिला ए जनाबे मुस्लिम अलैहिस्सलाम दो रोज़ा मजालिस मुनअक़िद की गई जिसको हुज्जतुल इस्लाम मौलाना मासूम रजा साहब ने खिताब किया। क़ब्ले मजलिस जनाब काजिम सरफराज साहब, जनाब सैय्यद एम अली तक़वी साहब”आरज़ू सीबारी” जनाब यासिर साहब, ने नजरानऐ अक़ीदत पेश किया।
पहली मजलिस में मौलाना मासूम रजा साहब ने अपने बयान में इमाम मोहम्मद बाकिर अलैहिस्सलाम की जिंदगी पर रोशनी डाली उन्होंने बताया सबसे पहले इमाम मोहम्मद बाकिर अलैहिस्सलाम के दौर में इस्लामी सिक्का रायज किया गया। इसके अलावा मौलाना ने कहा कि इमाम मोहम्मद बाकिर अलैहिस्सलाम ने तालीम की अहमियत को देखते हुए यूनिवर्सिटी कायम की जिसमें हर तरह की तालीम दी जाती थी चाहे वह इल्में नजूम हो या इल्मे तिब। इमाम मोहम्मद बाकिर अलैहिस्सलाम के 400 से ज्यादा शागिर्द थे।
दूसरी मस्जिद में मौलाना ने सादेक़ीन के उनवान से गुफ्तगू की और उन्होंने अल्लाह का पैगाम देते हुए समझाया कि अल्लाह ने कहा है कि सच्चों के साथ हो जाओ उन्होंने तफ्सील से सच और सच्चाई और सच्चों पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि सिदक़ क्या है सादिक़ कौन है?
मजलिस के आखिर में मौलाना ने जनाबे मुस्लिम के साथ कर्बला के मसायब बयान किए। बाद में अंजुमन ने नौहा ख़्वानी की।

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