देश में लगभग 13 करोड़ लोग ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया नामक रोग से प्रभावित है:डॉ सूर्यकांत

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    सरस्वती डेंटल कॉलेज 20-25 सितंबर तक डेंटल स्लीप मेडिसिन पर पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है।इस सम्मेलन की घोषणा करने के लिए आज एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया गया।सभा को प्राचार्य एवं सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. के. एन. दुबे, सम्मेलन सचिव अरविंद त्रिपाठी, और केजीएमयू के श्वसन विभाग के अध्यक्ष और सम्मेलन सलाहकार डॉ सूर्यकांत ने सभा को संबोधित किया।
    डॉ सूर्यकांत ने बताया कि देश में लगभग 13 करोड लोग ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप ऐपनिया नामक रोग से प्रभावित हैं। इस बीमारी मे रात मैं सोते समय जोर से खराटे आते हैं , नींद में व्यवधान होता है, ऑक्सीजन की कमी हो जाती है जिसके फलस्वरूप शरीर में कई बीमारियां पैदा हो जाती है। ऐसे लोगों को दिन में नींद बहुत आती है, कई बार वाहन चलाते हुए सो जाते हैं जिससे एक्सीडेंट हो जाता है। उनहोने इस बीमारी के 5 प्रमुख लक्षण बताएं –
    १) व्यस्क 30 साल से ऊपर
    २) मोटापा
    ३) थोड़ी-छोटी और धंसी हुई
    ४) गर्दन परिधि 42 सेंटीमीटर से ज्यादा
    ५) रात को खर्राटे आना
    अतः ऐसे लोगों को देखते ही यह संभावना व्यक्त की जा सकती है कि इन लोगों को ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप ऐपनिया हो सकता है। इस बीमारी के निदान के लिए स्लीप स्टडी पॉलीसोम्नोग्राफी जांच कराई जाती है।

    डॉक्टर बी पी सिंह ने बताया कि ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप ऐपनिया से से पीड़ित 80% लोगों को यह जानकारी हि नहीं होती की यह कितनी जानलेवा बीमारी है। यह बीमारी स्ट्रोक का भी बहुत बड़ा कारण होती है। इसलिए इस बीमारी के बारे में जानना वह इसके उपचार के तौर-तरीकों की जानकारी रखना अनिवार्य है।
    डॉ त्रिपाठी ने कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया और स्लीप ब्रुक्सिज्म की व्यापकता और प्रभाव के बारे में जागरूकता फैलाना है। भारत द्वारा आयोजित इस प्रकार का यह पहला सम्मेलन है जो COVID-19 के कारण वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर आयोजित किया जा रहा है। देश भर के सभी कॉलेजों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है । सरस्वती डेंटल कॉलेज भाग्यशाली है कि उसके इस पथप्रदर्शक प्रयास से पूरी चिकित्सा और दंत चिकित्सा बिरादरी लाभान्वित होगी।

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