सुप्रीम कोर्ट की सीएए पर अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद, अगली सुनवाई 5 जजों की संविधान पीठ के सामने होगी

    0
    288

    लखनऊ 22 जनवरी 2020 सुप्रीम  कोर्ट ने नागरिकता संशोधन कानून से जुड़ी 144 याचिकाओं पर जवाब देने के लिए सरकार को 4 हफ्ते का वक्त दिया है। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस कानून पर फिलहाल कोई अंतरिम रोक नहीं लगाएगा। कोर्ट ने साथ ही संकेत दिया कि वह याचिकाओं की सुनवाई के लिए संविधान पीठ का गठन कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट को सी ए ए से जुड़े मामले की सुनवाई नहीं करने को कहा है।
    चीफ जस्टिस बोबडे, जस्टिस अब्दुल नजीर, जस्टिस संजीव खन्ना की 3 जजों की पीठ ने आदेश देते हुए कहा कि असम और त्रिपुरा पर अलग से सुनवाई होगी। बता दें कि सुनवाई के दौरान कानून को चुनौती देने वाले पक्ष की दलील रखते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि जब तक इस मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती तब तक इस को निलंबित कर दिया जाना चाहिए। सिब्बल ने संविधान पीठ के गठन की मांग भी की।
    कोर्ट ने कहा कि वह असम और त्रिपुरा का सी ए ए से जुड़े मामले की अलग से सुनवाई करेगा। अदालत ने कहा कि इन दो राज्यों का मामला देश के दूसरे राज्यों से अलग है। अदालत ने कहा, ‘असम त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश से जुड़े मामले को अलग से सुना जा सकता है।’ बता दें कि उत्तर प्रदेश बिना कोई नियम बनाए ही सी ए ए से जुड़ी कार्रवाई शुरू कर चुका है।
    सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही सी ए ए से जुड़े मामले की सुनवाई के लिए संविधान पीठ बनाने के भी संकेत दिए। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह याचिकाओं की सुनवाई के लिए संविधान पीठ का गठन करेगा।
    मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वह केंद्र की पूरी बात सुने बगैर कोई एकतरफा आदेश नहीं दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि सभी याचिकाओं को केंद्र के पास पहुंंचना जरूरी है।
    चीफ जस्टिस ने असम के तर्क को अलग रखते हुए कहा कि वहां की स्थिति अलग है। उन्होंने कहा कि हर याचिका सरकार के पास जानी जरूरी है। सिब्बल की निलंबन वाली दलील पर चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा कि यह एक तरीके से रोक की ही बात होगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि असम और त्रिपुरा से दाखिल सी ए ए विरोधी याचिकाओं की अलग से सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सी ए ए पर अब 144 से ज्यादा याचिकाओं पर सुनवाई नहीं होगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि अब इससे ज्यादा याचिका दाखिल नहीं होगी।
    सिब्बल ने कहा कि नागरिकता देकर वापस नहीं ली जा सकती है। उन्होंने दलील दी कि इसपर कोई अंतरिम आदेश जारी होना चाहिए। सिब्बल ने कहा कि हम कानून पर रोक की मांग नहीं कर रहे हैं बल्कि इसे दो महीने के लिए निलंबित कर दें।
    सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट में भीड़ का सवाल उठाते हुए कहा कि कोर्ट का मौहाल शांतिपूर्ण होना चाहिए। सिब्बल ने कहा कि इस पहलू पर तुरंत सुनवाई होनी चाहिए। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि इन याचिकाओं पर जवाब देने के लिए सरकार को 6 हफ्तों का वक्त चाहिए।
    अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि हमने 60 याचिकाओं पर जवाब तय किए हैं जबकि कोर्ट में 144 याचिकाएं हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट अब और पिटिशन दाखिल करने की इजाजत नहीं दे। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में वह जल्दबाजी में कोई आदेश नहीं दे सकती है।
    इन याचिकाओं में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और कांग्रेस नेता जयराम रमेश की याचिकाएं भी शामिल हैं।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here