सख्ती / नियमों का पालन नहीं करने पर आरबीआई ने 14 एनबीएफसी का लाइसेंस रद्द किया, 9 एनबीएफसी ने खुद सरेंडर किया

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    21 मई 2020

    मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को 14 नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनीज (एनबीएफसी) का लाइसेंस रद्द कर दिया। आरबीआई की ओर से जारी बयान के मुताबिक इन एनबीएफसी का लाइसेंस आरबीआई एक्ट-1934 की धारा 45-I के सेक्शन-ए के नियमों के अनुसार काम नहीं करने पर रद्द किया गया है। इसके अलावा 9 एनबीएफसी ने खुद अपना लाइसेंस सरेंडर कर दिया है। यह कंपनियां भी आरबीआई एक्ट-1934 के अनुरूप कार्य नहीं कर पा रही थीं।

    इन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया

    जयभारत क्रेडिट लिमिटेड, मुंबई
    दानी लीजिंग लिमिटेड, भोगल दिल्ली
    होनहार इन्वेस्टमेंट लिमिटेड, कालकाजी एक्सटेंशन दिल्ली
    प्रोफिशिएंट लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड इलाहाबाद
    प्राइमस कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता
    आशुतोष सिक्युरिटीज प्राइवेट लिमिटेड, मानक विहार दिल्ली
    भारत फाइनेंस एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड कोलकाता
    आंचल लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड मायापुरी दिल्ली
    सिग्नेचर फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम हरियाणा
    डी बी लीजिंग एंड हायर पर्चेज प्राइवेट लिमिटेड, जालंधर
    जिंदल फिनलीज प्राइवेट लिमिटेड, नाभा पंजाब
    बीएलएस इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड कोलकाता
    हेल्प फाइनेंस लिमिटेड, अमृतसर
    एजकोट एडवांसेज लिमिटेड, लुधियाना
    इन कंपनियों ने किया सरेंडर

    डिस्ट्रीब्यूटर्स (बॉम्बे) प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई
    निशी सिक्युरिटीज प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद
    पेनरोज मर्केंटाइल्स लिमिटेड, कोलकाता
    रिलायंस नेट लिमिटेड, मुंबई
    आरएनजी फिनलीज प्राइवेट लिमिटेड, राजकोट
    मनोहर फाइनेंस इंडिया लिमिटेड, जीटीबी नगर दिल्ली
    निश्चया फिनवेस्ट प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु
    सांघी हायर पर्चेज लिमिटेड, हिसार हरियाणा

    तय मानक के अनुसार कार्य नहीं करने पर आरबीआई समय-समय पर विभिन्न वित्तीय संस्थानों पर कार्रवाई करता रहता है। वित्त वर्ष 2019 में आरबीआई ने 1851 एनबीएफसी का लाइसेंस रद्द किया था। इससे पहले वित्त वर्ष 2018 में 224 और वित्त वर्ष 2017 में 169 एनबीएफसी का लाइसेंस रद्द किया गया था। इस तरह से हर साल एनबीएफसी का लाइसेंस रद्द होने की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

    जानकारों का कहना है कि लॉकडाउन में एनबीएफसी के सामने बड़ी समस्या हो गई है। आरबीआई ने कर्जदारों को मोराटोरियम की सुविधा दे रखी है जिसके आगे बढ़ने की संभावना है। बाजार में उधारी की मांग नहीं है। ऐसे में छोटी-मोटी एनबीएफसी का टिकना मुश्किल है। आने वाले दिनों में लाइसेंस सरेंडर करने वाली एनबीएफसी की संख्या बढ़ सकती है।

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