शिया समुदाय का एतिहासिक निर्णय: प्रशासन की अपील पर नही निकाला जायेगा ताबूत का जुलूस

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    लखनऊ। मुशकिल कुशा शेरे खुदा, अली मुर्तज़ा हज़रत अली अ0स0 की शाहादत के मौके पर हर साल 21 रमज़ान को लखनऊ मे शिया समुदाय की तरफ से निकाला जाने वाला ताबूत का जुलूस इस बार नही निकाला जाएगा। कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लागू किए गए लाक डाउन के बाद प्रशासन की तरफ से शिया समाज से ये अपील की गई थी कि इस बार आप न ही जुलूस निकाले और न ही हज़रत अली का ताबूत ही सजाए ।
    प्रशासन द्वारा नोटिस के माध्यम से की गई इस अपील को शिया समुदाय द्वारा देश और समाज हित मे स्वीकार करते हुए ऐतिहासिक फैसला किया है कि इस बार 19 रम़जान की सुबह निकाला जाने वाला ग्लीम के ताबूत का जुलूस भी नही निकाला जाएगा और न ही 21 रमज़ान की सुबह हज़रत अली अ0स0 के ताबूत का जुलूस निकाला जाएगा।
    कर्बला तालकटोरा मे हज़रत अली अ0स0 के ताबूत को अकीदतमंद अज़ादार सुपुर्द-ए-खाक करते थे । 19 और 21 रमज़ान को शिया समुदाय द्वारा निकाले जाने वाले इन दो जुलूसो मे हज़ारों का मजमा होता था क्यूकि इस बार कोरोना वायरस का देश मे खतरा है और इस वायरस से बचाव के लिए पूरे देश मे लाक डाउन लागू है साथ ही लोग एकत्र न हो इसके लिए धारा 144 भी लागू है जुलूस मे हज़ारो का मजमा होता है इस लिए शिया समाज ने अपने दिलो पर पत्थर रख कर ये महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए निर्णय लिया है कि इस बाद देश और समाज हित मे शिया समुदाय की तरफ से लखनऊ मे ये दोनो महत्वपूर्ण जुलूसो को स्थगित किया जाता है।
    शिया समुदाय इस बार न तो जुलूस ही निकालेगा और न ही अकीदतमंद अज़ादारो को इस बार ताबूत मुबारक की ज़ियारत करने का मौका ही मिलेगा । ज़ियारत के लिए इस बार ताबूत को भी नही सजाया जाएगा। आपको बता दें कि इन दोनो ताबूतो को शान्तीपूर्ण माहौल मे सम्पन्न कराने के लिए पुलिस को काफी मशक्कते करनी पड़ती थी लेकिन इस बार शिया समाज द्वारा जुलूसो को स्थगित किए जाने के एलान के बाद प्रशासन ने चैन की सांस ली है क्यूकि इस बार अगर जुलूस निकला जाता तो शायद कोरोना वायरस का खतरा बढ़ सकता था।

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