वॉर्म मून, पिंक मून के बाद आज ऑनलाइन देखा गया सुपर फ्लॉवर मून:डॉ सुशील द्विवेदी

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    7 मई, 2020, लखनऊ। साल 2020 का आखिरी सुपरमून 7 मई, गुरुवार को शाम 4:15 बजे अधिक उजाला होने की वजह से देश मैं इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन ढंग से आकाश में देखा गया।
    पर्यावरणविद, लेखक, स्टेट कोऑर्डिनेटर विद्यार्थी विज्ञान मंथन उत्तर प्रदेश व स्टेट कोऑर्डिनेटर इंटरनेशनल ग्रीन ओलंपियाड (TERI/ टेरी) के सुशील द्विवेदी ने गुरुवार को बताया कि
    लोगों को आराम से घर बैठे इंटरनेट के माध्यम से खगोलीय घटनाओं को लाइव टेलिकास्ट करने वाले Slooh और Vitual Telescope समेत कई यूट्यूब चैनल्स ने चांद की मनमोहक सुंदरता का अहसास कराया।

    सुपर मून क्या होता है

    पिछली बार सुपरमून 8 अप्रैल को दिखाई दिया था और उस समय इसे सुपर पिंक मून कहा गया था इस बार 7 मई वाले मून को सुपर फ्लॉवर मून कहा गया I पिंक सुपरमून नाम के पीछे अमेरिका में बसंत के मौसम में खिलने वाले एक फूल के नाम पर रखा गया था । इसी तरह मई के महीने में पड़ने वाले इस सुपरमून को फ्लॉवर मून कहने के पीछे अमेरिका के एलगोनक्विन जनजाति द्वारा मई के महीने की पूर्णिमा के दिन उनके इलाके में बड़ी संख्या में फूल खिलने की वजह थी।
    सुपरमून एक ऐसी खगोलीय घटना होती है जिसमें पूर्णिमा की रात चंद्रमा धरती की कक्षा में सबसे पास के क्षेत्र में होता है. पास होने का कारण पूर्णिमा का यह चांद करीब 7 फीसदी अधिक बड़ा और लगभग 30 फीसदी ज्यादा चमकदार दिखता है. कक्षा में परिक्रमा करते हुए चंद्रमा की पृथ्वी से दूरी 3,56,400 से लेकर 4,06,700 किलोमीटर के बीच तक होती है.7 मई 2020 को सूर्यास्त के समय पूर्व में उदय होने वाला पूर्णिमा का चंद्रमा धरती से केवल 3,57,042 किलोमीटर की दूरी पर होगा। पूरे साल में छह सुपरमून दिखने थे तीसरे सुपरमून के बाद इस साल के अन्य फुल मून सुपरमून, 17 सितंबर, 16 अक्टूबर और 15 नवंबर को दिखेंगे लेकिन वे सब इससे छोटे दिखेंगे
    असल में पूर्णिमा तो हर 29-30 दिन पर होती है लेकिन ऐसा खगोलीय संयोग साल में गिने चुने बार ही बनता है जब पूर्णिमा की रात चंद्रमा धरती की कक्षा में घूमते हुए उसके इतने पास आता हो। इस कॉस्मिक कॉम्बो को वैज्ञानिक सुपरमून की संज्ञा देते हैंI

    रविवार को देखें दुर्लभ ‘सुपरमून’ चंद्र ग्रहण

    असामान्य बात यह है कि सुपरमून के साथ-साथ पूर्ण चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है। इस प्रकार की घटनाएं 1900 के बाद से केवल 5 बार (1910, 1928, 1946, 1964 और 1982 में) हुई हैं। पूर्ण चंद्रग्रहण रविवार रात को 10 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगा और 1 घंटा 12 मिनट तक रहेगा। प्राचीन किंवदंती के अनुसार इस ‘सुपर ब्लड मून’ को संभावित प्रलय का अशुभ संकेत माना जाता है। इससे पहले ‘सुपर मून’ के साथ पूर्ण चंद्र ग्रहण 33 वर्ष पूर्व पड़ा था और पिछले 115 वर्षों में ऐसा मात्र 5 बार हुआ हैI सुपरमून के बाद 5 जून को चंद्र ग्रहण का नजारा देखने को मिलेगा। यह ग्रहण 5 जून की रात से शुरू होगा, जो भारत में भी दिखाई देगा।

    21 जून को देखें वलयाकार सूर्य ग्रहण

    जून की 21 तारीख को एक और अदभुत खगोलीय घटना के रूप मैं सूर्य ग्रहण भी लगने वाला है यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा जिसे देश के उत्तराखंड राज्य मैं देहरादून, राजस्थान राज्य मैं सूरतगढ़ , हरियाणा राज्य मैं कुरुक्षेत्र ,सिरसा और यमुनानगर से स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा । वलयाकार अवस्था का संकीर्ण पथ उत्तरी भारत से होकर गुजरेगा। देश के शेष भाग में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई पड़ेगा।

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