लॉकडाउन कोरोना को रोकने का समाधान नहीं। सैय्यद तक़वी

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    लॉकडाउन कोरोनावायरस को रोकने का समाधान नहीं है इस बात को हमें और सरकार को अच्छी तरीके से समझ लेना चाहिए। आज देश में तेजी से कोरोना वायरस के मामले बढ़ रहे हैं लोगों में डर भी है और लापरवाही भी।
    कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश 68 दिनों तक लॉकडाउन रहा। उसके बाद भारत अब अनलॉक दौर में है नतीजा क्या हासिल हुआ हमें? क्या हमने जीती हुई बाजी हाथ से निकल जाने दी या फिर हम लापरवाही का शिकार हो गए। कुछ भी हो लेकिन कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बीच, देश में फिर से लॉकडाउन लागू करने पर चर्चा होने लगी है। यह सच है या अफवाह यह तो आने वाले समय में पता चलेगा। लेकिन क्या कोरोना के मामले पर लगाम लगाने के लिए लॉकडाउन की फिर जरूरत है?
    कोरोनावायरस से मौतें हो रही हैं लेकिन हमें कोरोनावायरस के अलावा बेरोजगारी और भूख से होने वाली मौतों के बारे में भी सोचना होगा।
    कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित दिल्ली, तमिलनाडु और महाराष्ट्र की सरकारों ने साफ कर दिया है कि वो लॉकडाउन नहीं लगा रहे है। और हकीकत भी यही है कि लॉकडाउन कोरोना वायरस को रोकने का समाधान नहीं है।
    आज देश के सामने बहुत बड़े बड़े सवाल मुंह खोले हुए खड़े हैं क्योंकि हमारे देश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत अच्छी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है और जैसे-जैसे कोरोना के मामले बढ़ेंगे उसके साथ ही चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की जररूत भी ज्यादा पढ़ेगी, जो हमारे पास पर्याप्त संख्या में नहीं हैं। और जो हैं वो और ज्यादा काम करेंगे और उन पर दबाव भी बढ़ेगा। हमारे यहां पर मरीजों की संख्या ज्यादा है जबकि बेड और स्वास्थ्यकर्मी कम हैं। लोगों को बेड नहीं मिल पा रहे हैं और आने वाले दिनों में चीजें और खराब होंगी।
    हम उस स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं जहां पर मरीज ज्यादा होंगे और स्वास्थयकर्मी कम। जिसके कारण दबाव बढ़ेगा और मृत्यु दर भी बढ़ेगी। और ऐसा अब होने लगा है। एक तरफ कोरोनावायरस का कहर, डर, खौफ दूसरी तरफ चिकित्सा के नाम पर भ्रष्टाचार भूख बेरोजगारी इन सब ने जनता का खून चूस लिया है।
    हालात को देखकर लगता है कि लोगों का आपस में संपर्क बढ़ गया है, जिसके कारण देश में केस बढ़ रहे हैं।
    सरकार ने सख्त लॉकडाउन लागू किया था, जो कोरोना का समाधान नहीं है। नतीजा यह हुआ कि लॉकडाउन के कारण कई लोगों का रोजगार छीन गया, नौकरियां चली गई उद्योग बंद हो गए छोटे व्यवसाय बंद हो गए लोग भुखमरी के कगार पर आ गए इन सब वजहों से भी मौतें हुई जिसको हमने नजरअंदाज कर दिया । एक बड़ा सवाल क्या आज देश में सिर्फ कोरोनावायरस से मौतें हो रही हैं?
    जवाब है नहीं।
    कोरोना से अभी हर रोज लगभग 400 मौतें हो रही हैैं, लेकिन क्या कभी सोचा गया कि कुपोषण के कारण 5 साल से कम उम्र के 2 हजार बच्चों की हर रोज मौत हो रही है शायद ये अब बढ़कर 5 हजार हो गई है इसके अलावा हर रोज करीब 6 हजार हार्ट के मरीज मरते हैं। आखिर इन मौतों का क्या? सोचिए लेकिन सही सोचिए, करिए मगर दुरुस्त काम करिए सिर्फ सोचने और करने से कुछ नहीं होता है।
    देश और प्रदेश की सरकारों को यह बात अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि अगर लॉकडाउन फिर लगा तो देश और शहर बच नहीं पाएंगे। हमें इस वायरस के साथ रहने के लिए और जिंदगी बिताने के लिए स्थानीय स्तर पर समाधान निकालना होगा।
    देश में 25 मार्च को लॉकडाउन लगा था तब 536 केस थे और 11 लोगों की मौत हुई थी। आज की संख्या हमारे सामने है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से रविवार को जारी आंकड़ों के अनुसार भारत में इस वायरस से संक्रमितों की संख्या 320,922 हो गई है। रविवार की सुबह समाप्त हुए 24 घंटों में कोरोना के 11, 929 नए मामले सामने आए और 311 लोगों की मौत हुई। देश में अब तक 9195 लोगों की मौत हो चुकी है, हमें देखना होगा कि हमने लॉकडाउन से क्या हासिल किया! क्या लॉकडाउन सफल था?
    एक बात स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि लॉकडाउन के कारण वायरस से छुटकारा नहीं मिलेगा। वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए एक रणनीति होनी चाहिए। लॉकडाउन से वायरस जरूर धीमा हुआ था मगर भारी नुकसान भी हुआ जिसकी भरपाई करना आसान नहीं है।
    जयहिंद।

    सैय्यद एम अली तक़वी
    syedtaqvi12@gmail.com

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