लॉकडाउन के बाद मध्यमवर्ग का आदमी आत्महत्या करने की राह पर ढ़केल दिया गया…!

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    लेखक एस.एन.लाल
    भ्रष्टाचार देश में आज़ादी के बाद से मुख्यधारा में जूड़े गया है…, लेकिन पहले भ्रष्टाचार छोटे स्तर पर होता था, यानि नीचे से ऊपर जाता था, सबको कुछ न कुछ मिलता था सभी जगह पैसा पहुंचने के कारण काम भी होता जिससे विकास की गति बनी हुई थी और रिश्वत देने वाले को भी कम रिश्वत देना पड़ती थी। लेकिन आज भ्रष्टाचार की धारा ऊपर से नीचे आती है, ओह…नीचे आ ही नहीं पाती…!, इसी लिए लोगो के काम और पेमेन्ट फंसे रहते है या बहुत देर से होते है और कही डीलिंग अधिकारी ही बदल गया, तो न काम मिला और न ही रिश्वत वापस हुई, इस कारण लोग बड़ी डीलिंग और ऊपर की ओर करने लगे है जहां मज़बूती रहे…यानि भ्र्राष्टाचार भी केन्द्रित हो गया ! इस बात का साक्ष्य संलग्न भाजपा नेता कृृति आज़ाद ये पुराना विडियो है।
    एस.एन.लाल
    आप देखे कोरोना से पहले ही देश आर्थिक मार और बेरोज़गारी झेल रहा था जिसके कारण देश में आत्महत्याओं का गिराफ बढ़ा था, लेकिन कोरोना और प्रशासन की सख़्ती के कारण इस गिराफ में काफी इज़ाफा हुआ…! ग़रीब तबक़ा तो रोज़ कमाने खाने वाला था ही, तो उसकी स्थिति ज़्यादा खराब हुई क्योंकि उसके पास खाने को कुछ नहीं था। इस ग़रीब तबक़े की मद्द सरकार और अमीर लोगों से कहीं ज़्यादा मध्यमवर्ग के लोगो ने की, आर्थिक रुप से मध्यमवर्ग जोकि देश का लगभग 50 प्रतिशत है, और यही देश को संभाले भी है। अमीर पर कोई असर नहीं पड़ा, वह अपनी पूंजी बचाने के लिए मध्यमवर्ग के 30 प्रतिशत वर्कस से काम चलाने लगा, 70 प्रतिशत लोगो को एक महीने का नोटिस देकर नौकरी से निकाल दिया। और इन 30 प्रतिशत वर्कस को भी कुछ संस्थान आधा वेतन दे रहे हैं..! क्योंकि सरकार ने भी कह दिया आपस में समझ लें..!
    एस.एन.लाल
    कोरोना की वजह से बेरोज़गारी व आर्थिक मार के कारण मध्यमवर्ग के ही लोग आज ज़्यादा हताहत हुए हैं, जिनको हम प्रवासी मज़दूर कहते हैंे, वह ईठा-गुम्मा उठाने वाले सिर्फ मज़दूर नहीं, इनमें कम्प्यूटर आपरेटर, एकाउन्टेन्ट, मार्केट का काम करने वाले, सेल्समैन, इलेक्ट्रीशियन व मेकेनिक आदि भी शामिल है, जिनकी गिनती मध्यमवर्गी परिवारों मंे होती है, अधिकतर वही मरे है…, भूख से क्योंकि वह भीख मांग नहीं सकते या सभ्य वयक्ति खाने के लिए चोरी भी नहीं कर सकता..!
    एस.एन.लाल
    लॉकडाउन के बाद और मध्यमवर्ग को और भी आत्महत्या करने की राह पर ढ़केला जा रहा, पेट्राल के दाम बढ़ा दिये गये, गाड़ी से सम्बन्धित चलानों के चार्ज बढ़ा गये, और गाड़ियो की चेकिन्ग और चालान ज़्यादा की जाने लगी, बैंक कर्ज़ की ईएमआई में कोई माफी नहीं, दवा – बिजली व पानी आदि जैसे जीवन की ज़रुरतों वाली चीज़ों के किसी बिल में कोई छूट नहीं…! बचे हुए रोज़गार जिन्होंने ऑन लाइन काम शुरु किया तो मोबाइल व कम्प्यूटर मंहगे कर दिये गये…! जो आपदा प्रकोष्ट व केयर फण्डों में जनता से पैसा जमा कराया गया, वह क्यों और कहां प्रयोग हो रहा है।
    लाकॅडाउन खुलने के बाद मध्यवर्ग का व्यक्ति किस तरह अपनी रोटी का जुगाड़कर कर रहा है, उसपर सरकार की ओर किसी प्रकार की कोई रियात नहीं, जो है…वह केवल समाचापत्रों तक सीमित !
    एस.एन.लाल

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