भाजपा विधायक सुरेश्वर सिंह बोले, अधिकारियों की कमाई का जरिया बना कोरोना, पूरा जिला लूटा जा रहा।

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    23/5/2020
    उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में महसी के भाजपा विधायक सुरेश्वर सिंह ने कहा कि कोरोना बीमारी अफसरों की कमाई का जरिया बन गई है। चौकी चौक का इंचार्ज खुलेआम वसूली कर रहा है। देश के विभिन्न महानगरों से आए मजदूरों को केडीसी से बिना जांच व किट दिए बिना ही भगा दिया गया। केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से जारी निर्देशों का जिले के अफसर पालन नहीं करवा रहे हैं। माफ होने के बावजूद भी मंडी में 6 प्रतिशत टैक्स वसूला जा रहा है।
    सोमवार की आधी रात को भूखे पेट मजदूरों को पैदल आते देख कर महसी विधायक सुरेश्वर सिंह ने रुककर उनकी व्यथा सुनी, तो उनका दिल पसीज गया। डीएम को जानकारी देने के आधे घंटे बाद अपनी सफाई पेश करने पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट को जमकर फटकार लगाई।
    जिला प्रशासन पर सरकार की मंशा के अनुरूप काम न करने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई। विधायक की नाराजगी से जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। सभी मजदूरों की जांच के बाद किट के साथ उनके घर तक वाहन से भेजने के विधायक ने निर्देश दिए।
    विधायक सुरेश्वर सिंह सोमवार को आधी रात चंद्रिकापुरी स्थित भाजपा कार्यालय से अपने आवास के लिए जा रहे थे। रास्ते में एक मजदूर पैदल जाता हुआ दिखाई पड़ा, तो विधायक उसे अपने वाहन में बैठाकर खाना खिलाने के लिए अपने आवास ले जा रहे थे। वह शहर के गांधी स्कूल के पास पहुंचे ही थे तभी देखा कि सामने से लगभग 70 मजदूर पैदल ही चले आ रहे हैं। इस पर विधायक ने डीएम शंभु कुमार को फोन पर जानकारी दी, लेकिन डीएम ने अधिकारियों के मुस्तैद होने की बात कहकर सिटी मजिस्ट्रेट को भेजने की बात कही।
    विधायक के आधे घंटे के इंतजार के बाद सिटी मजिस्ट्रेट जय प्रकाश व एसडीएम मौके पर पहुंचे। विधायक ने सवाल किए तो सिटी मजिस्ट्रेट ने गोलमोल जवाब देकर बात टालने का प्रयास किया । इस पर विधायक का पारा चढ़ गया और दोनों अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। विधायक के निर्देश के बाद सभी को भोजन की व्यवस्था कराने की बात अधिकारियों ने कही। विधायक ने कहा कि जिला प्रशासन काम नहीं कर रहा है। फोन करके जानकारी देने पर जिस तरह बताया गया कि सारे अधिकारी मौजूद हैं और आधे घंटे बाद अधिकारी पहुंच रहे हैं। इससे साफ है कि जिले के अधिकारी सरकार के मंशा के अनुरूप काम नहीं कर रहे हैं। मजदूर पैदल जा रहे हैं और उन पर इन प्रशासनिक अफसरों की निगाह क्यों नहीं पड़ रही है। गांव लौट रहे मजदूरों को खाद्यान्न किट, नकदी आदि जो दी जानी चाहिए थी, वह भी इन्हें मुहैया नहीं कराई गई है।

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