बाराबंकी मो जलील यार खां वारसी साहब का इंतक़ाल

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    बाराबंकी बज्म़- ए- रहमत बाराबंकी के एक अहम रूक्न मो जलील यार खां वारसी साहब नायब सदर बज्म़- ए- रहमत बाराबंकी दुनिया फानी से रुकसत हुए, (इन्नालिल्लाही व इन्नलेहीराजिऊन) इस दुखद घड़ी में सदरबज्म़- ए- रहमत हाफिज इशरत अली अंसारी और आराकिन बज्म़- ए- रहमत की तरफ से खिराज अकीदत पेश की और मगफिरत की दुआ की गई उनकी खिदमात को याद करते हुए बज्म़- ए- रहमत के सदर हाफिज इशरत अली अंसारी ने कहा जनाब जलील यार खां वारसी साहब के इस दुनिया को छोड़कर चले जाने पर बज्म़- ए- रहमत को बड़ा झटका लगा है उनकी कमी हमेशा महसूस होती रहेगी और इस दुख की घड़ी में पूरी बज्म़- ए- रहमत उनके परिवार वालों के साथ खड़ी है इस मौके पर मौजूद बज्म़- ए- रहमत के अराकीनो ने मगफिरात की दुआ की, कोरोना महामारी का ध्यान रखते हुए वीडियो कॉलिंग के माध्यम से मीटिंग का आयोजन हुआ
    इस दुख के मौके पर हाफिज इशरत अली अंसारी, अब्दुल हक एडवोकेट, जफर अंसारी, अख्तर वारिस एडवोकेट, कारी अजीम मसायरवी, मौलाना अलीम जमाई, नसीर शायर, ताज बाबा राईन, जमरूद्दीन अंसारी, मोहनुद्दीन अंसारी, चौधरी मोहम्मद सिद्दीक, आसिफ सभासद मौजूद रहे

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