बनारस विश्वविद्यालय में ढूंढा जा रहा है शिक्षा का धर्म

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    लखनऊ  21/11/ 2019 बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर राजस्थान के निवासी फिरोज खान की नियुक्ति पर घमासान मचा हुआ है। डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति के बाद उठे विवाद पर कई मुस्लिम अध्यापकों का कहना है कि शिक्षा का कोई धर्म नहीं होता है सभी धर्म समान हैं। इस मसले पर एकजुटता की जरूरत है। इस तरह की बातें देश में सौहार्द की मिशाल है। उन्होंने कहा कि ऐसे विवाद जबरदस्ती पैदा किए जा रहे हैं।

    इस्लामिया गर्ल्स इंटर कॉलेज बरेली की संस्कृत शिक्षिका डॉ साईमा अजमल ने कहा कि भाषा किसी धर्म विशेष से नहीं जुड़ी है।हिन्दुस्तान एक खूबसूरत गुलदस्ता है। गोरखनाथ क्षेत्र में मोहम्मद इस्लाम के परिवार के पांच सदस्य संस्कृत की शिक्षा दे रहे हैं। परिवार का कहना है कि संस्कृत को किसी धर्म से न जोड़ें। यह भी अन्य भाषाओं की तरह ही है। लखनऊ के कालीचरन इंटर कॉलेज में उर्दू शिक्षक डॉ. हरि प्रकाश श्रीवास्तव का कहना है कि कोई भी भाषा, मजहब या कौम की नहीं होती है। उसे कोई भी पढ़ सकता है और पढ़ा सकता है। भाषा में मजहब की कैद नहीं है। हिन्दू होते हुए मैंने गोरखपुर विश्वविद्यालय उर्दू में पीएचडी की और आज उर्दू पढ़ा भी रहा हूं।
    अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अध्यापकों ने इसे संकीर्ण मानसिकता बताया।

    एकतरफ विश्वविद्यालय के छात्र फिरोज की नियुक्ति के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, तो वहीं कुछ हिंदू संगठन भी इसके विरोध में उतर आए है। तस्वीर राजनीतिक होती जा रही है।
    फिरोज के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग सामने आ रहे हैं। अब हिंदू समाज के कुछ साधु संत फिरोज के समर्थन में उतर आए हैं। साधु संतों ने फिरोज की नियुक्ति के विरोध को गलत बताया है। वहीं दूसरी तरफ बगरू के रामदेव गोशाला में फिरोज खान के पिता रमजान खान ने भजन गाए, जिसमें हिंदू समाज के कई साधु संत शामिल हुए।
    साधु संतों ने कहा कि भाषा और कर्मकांड किसी धर्म से जुड़े नहीं हैं।
    संतों ने एक स्वर से फिरोज की नियुक्ति के विरोध को गलत बताया और कहा कि केवल धर्म के आधार पर विरोध करना उचित नहीं है।

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