पुलिस के हाथ राहुल गांधी के गिरेबान नहीं लोकतंत्र के गिरेबान तक पहुंचे

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हिंदुस्तान आज उस दौर से गुजर रहा है जहां रोज नई नई कहानी नई नई इबारत लिखी जा रही है। झूठ को सच सच को झूठ दिखाया जा रहा है काले को सफेद सफेद को काला बताया जा रहा है।
आज जो कुछ हुआ शायद वह भारतीय इतिहास भारतीय लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है जहां उत्तर प्रदेश सरकार की पुलिस ने हिंदुस्तान की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष श्री राहुल गांधी को धक्का दिया गिरेबान पर हाथ डाला और गिरा दिया। यह तमाम हरकतें लोगों के मोबाइल में कैद हो गई और सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल भी हो रही हैं।
श्री राहुल गांधी के गिरेबान पर हाथ डालने वाले या डलवाने वाले ने क्या कभी अपने आप की राहुल गांधी से तुलना करने की कोशिश की है। अभद्रता और गिरेबान पर हाथ डालने वाले और डलवाने वाले दोनों का न तो कोई बीता हुआ वक्त है और ना ही कोई आने वाला वक्त।
लेकिन जिस व्यक्ति के गिरेबान पर हाथ डाला या उसके साथ अभद्रता की उसका बीता वक्त भी सुनहरा उसका आने वाला वक्त भी सुनहरा क्योंकि क्योंकि यह उस परिवार से ताल्लुक रखता है जहां जवाहरलाल नेहरू इंदिरा गांधी राजीव गांधी सोनिया गांधी जैसी शख्सियतें इतिहास में अपना नाम दर्ज करा चुकी।
जहां तक राहुल गांधी की बात है इस वक्त सरकार अगर किसी से सबसे ज्यादा डरी है तो वह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी हैं।
दोनों के साथ आज दुर्व्यवहार किया गया और सीमाओं को लांघने की कोशिश की गई यह भारतीय लोकतंत्र के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं है एक तरफ देश में हो रहे दुराचार बलात्कार को छुपाने के चक्कर में सरकार और प्रशासन जुल्म और दुराचार करने पर उतर आए।
जुल्म अत्याचार यहीं नहीं रुका बल्कि न जाने कितने कांग्रेसियों पर अलग-अलग जगह पर लाठी चार्ज करके जख्मी किया गया।
इसके अलावा निर्दयता बदतमीजी बेरहमी इन सब पर पुलिस इतना आतुर हो गई कि हाथरस की बेटी को न्याय दिलाने की मांग उठाने के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी की पूर्व अध्यक्ष और दिल्ली महिला प्रदेश कांग्रेस प्रमुख अमृता धवन जब उत्तर प्रदेश में दाखिल हुईं तो उनका बुरा हाल हो गया। बालात्कार की कोशिश तो नही हुई और न ही किसी दंगाई भीड़ का शिकार हुई, मगर हां पुलिस ने बेशर्मी की सीमाओं को लांघते हुए कपड़े फाड़ दिए और सुश्री अमृता बड़ी मुश्किल से दुपट्टे से अपना शरीर ढंक पायीं।
इस घिनौने काम से पूरे उत्तर प्रदेश की पुलिस बदनाम होगी। सरकार का क्या आज है कल नहीं रहेगी। लेकिन पुलिस प्रशासन तो वही रहेगा उसको भी इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि सरकारे आती जाती रहती हैं।
वैसे पिछले कुछ सालों में सरकार ने सब कुछ मुमकिन कर दिया इंसान पैदल हिंदुस्तान में एक शहर से दूसरे शहर जा सकता है जो पहले नामुमकिन था मगर अब मुमकिन है रोजगार बंद हो सकते हैं जो पहले नामुमकिन था मगर अब मुमकिन है लोगों की नौकरियां खत्म हो सकती हैं जो पहले नामुमकिन था मगर अब मुमकिन है लोग मर सकते हैं आत्महत्या कर सकते हैं यह पहले नामुमकिन था मगर अब मुमकिन है। चलते हुए नोट अचानक बेकार हो सकते हैं जो पहले नामुमकिन था मगर सरकार ने मुमकिन कर दिखाया। कहां तक फेहरिस्त गिनाई जाए इस दौर में सब मुमकिन हो गया है।
अब हर काम अचानक होता है अचानक की कोई सजा नहीं होती इसलिए अब सड़क पर जो लोग एक्सीडेंट करें वह भी अचानक होता है जानबूझकर नहीं करते इसलिए अब इसकी भी कोई सजा नहीं होगी। घूसखोरी भ्रष्टाचार बलात्कार सब अचानक होते हैं किसी की अब कोई सजा नहीं।
मगर सबको समझ जाना चाहिए क्योंकि जब ईश्वर अचानक कुछ करता है तो उसका सामना करने की ताकत किसी में नहीं होती इसका एक उदाहरण कोविड-19 पूरी दुनिया देख रही है।
अभी समय है अपने आप को सुधारो मानवता का पालन करो मानवता के रास्ते पर चलो सब को एक समान दृष्टि से देखो इसी में हम सब की ओर देश की भलाई है।
जयहिंद।

सैय्यद एम अली तक़वी
लखनऊ
syedtaqvi12@gmail.com

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