तड़पता लखनऊ,सिसकती जनता

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    उत्तर प्रदेश की राजधानी एवं गंगा जमुनी तहज़ीब के केन्द्र लखनऊ में बेखौफ अपराधी लगातार पुलिस प्रशासन को चुनौती दे रहे हैं। अभी 23 सितंबर को हुसैनगंज थाना क्षेत्र में शाहनवाज़ नामक युवक पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। जिससे शाहनवाज के पेट और सीने में गोली लगी। उसे इलाज के लिए ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। जहां आज शाहनवाज़ की मृत्यु हो गई। फिलहाल जो बात सामने आ रही है उसके अनुसार जमीन विवाद में चचेरे भाइयों ने गोली मारी है। फिलहाल आरोपियों की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। इसी संदर्भ में उतर प्रदेश पुलिस महानिरीक्षक ने आपातकाल बैठक भी बुलाई।
    राजधानी लखनऊ में बढ़ते अपराधों पर डीजीपी काफ़ी नाराज़ दिखाई दे रहे हैं इस संबंध में लखनऊ के एडीजी , आईजी और एसएसपी को भी तलब किया।
    सितंबर में लखनऊ में हुई लगातार फायरिंग ने एक भय का माहौल पैदा कर दिया है। पुलिस का डर अपराधियों में दिखाई नहीं दे रहा है। जिसकी वजह से पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
    घटनाएं दिल दहलाने के लिए काफी है।
    5 सितंबर, अमीनाबाद, विपिन सोनकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
    7 सितंबर, मड़ियाव, वकील द्वारा लाइसेंसी असलहे से फायरिंग।
    11 सितंबर, मानक नगर, प्रापर्टी डीलर गोलू द्वारा लाइसेंसी बंदूक से फायरिंग।
    12 सितंबर, सआदतगंज, इमरान पर बदमाशों ने गोली मार दी।
    16 सितंबर, मोहनलालगंज, प्रॉपर्टी डीलर की हत्या।
    17 सितंबर, गुडंबा थाना क्षेत्र, बियर शॉप सेल्समेन जीतेंद्र जायसवाल पर फायरिंग।
    20 सितंबर, हसनगंज, पागल आशिक द्वारा हत्या तथा खुद को भी गोली मारी।
    21 सितंबर, गोंसाईगंज, पूर्व फौजी द्वारा सब्जी विक्रेता की गोली मारकर हत्या।
    21 सितंबर को ही कैंट थाने के सामने दीपू पूरी वाले की गोली मारकर हत्या।
    21 सितंबर को ही मड़ियाव में मेराज नाम के युवक की गोली मार कर हत्या।
    और अब 23 सितंबर को शाहनवाज़ की हत्या।
    सवाल यह है कि एक इंसान दूसरे इंसान को क्या इतनी आसानी से गोली मार सकता है? क्या मारने वाला यह नहीं सोचता कि वह किसी के पिता/पुत्र/पति/भाई को मार रहा है? क्या पुलिस, कानून या सज़ा का कोई डर नहीं रह गया। अगर ऐसा है तो क्यूं है?
    पुलिस ने अपनी कार्यप्रणाली से अपना डर ख़त्म कर दिया है। हर जगह एडीजी , आईजी और एसएसपी या डीजीपी तो मौजूद रहेंगे नहीं। काम तो पुलिस चौकी, थाना तथा कोतवाली द्वारा ही होना है और इसके लिए अब आला अधिकारियों को सभी पर सख्त नजर रखनी होगी। क्यूंकि अपराध के बाद सस्पेंड करने से सुधार नहीं होगा। पुलिस जनता की मित्र समान है ये विश्वास बरकरार रखने की जरूरत है।

    सैय्यद एम अली तक़वी
    ब्यूरो चीफ- दि रिवोल्यूशन न्यूज़
    निदेशक- यूरिट एजुकेशन इंस्टीट्यूट

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