डा0 सूर्यकान्त ने बताए कोरोना काल में एलर्जी के उपचार एवं बचाव के तरीके।

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    डा0 सूर्यकान्त, विभागाध्यक्ष रेस्पिरेटरी मेडिसिन, के0जी0एम0यू0 एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, इण्डियन कालेज अॅाफ एलर्जी, अस्थमा एवं एप्लाइड इम्यूनोलाजी (प्ब्।।प्) को अमेरिकन कालेज आॅफ फिजिषियन (।ब्च्ब्व्छ) इंडिया चैप्टर 2020 के वर्चुअल कान्फ्रेंस में कोरोना काल में एलर्जी का उपचार विषय पर अतिथि वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया।
    डा0 सूर्यकान्त ने विभिन्न प्रकार की एलर्जी जैसे नाक, अस्थमा, त्वचा, अँाख एवं फूड एलर्जी के बारे मेे कोविड-19 से पहले एवं कोविड -19 आने के बाद में किये जाने वाले बचाव एवं इलाज के बारे में विस्तार पूर्वक बताया उन्होनें यह भी बताया कि भारतीय उपमहादीप में 10 करोड़ नाक की एलर्जी (एलर्जिक राहनाइटिस) के मरीज मौजूद हंै।
    डा0 सूर्यकान्त ने एलर्जिक राइनाइटिस, फ्लू एवं कोविड-19 के लक्षणों में अंतर बताया जैसे एलर्जिक राहनाइटिस में मरीज को छींक आना, आखों का लाल होना, नाक बहना, फ्लू में मरीज को ठंड के साथ बुखार आना, नाक बहना, सर दर्द एवं कोविड-19 के मरीजों में बुखार, सूखी खांसी एवं सांस का फूलना जैसे प्रमुख लक्षण पाये जाते हैं। इसके साथ ही उन्होनें जोर देकर कहा कि जैसे “हर चमकती चींज सोना नहीं होती, वैसे ही हर टपकती नाक कोरोना नहीं होती।“
    उन्होनें बताया की एलर्जिक राहनाइटिस, अस्थमा, त्वचा, आंख एवं फूड एलर्जी के जिन मरीजों ने उचित दवाइयों से अपनी एलर्जी के लक्षणांे को पूरी तरह नियत्रंण में कर रखा है, उनको कोविड का अतिरिक्त जोखिम नही है। लेकिन जिन मरीजों के एलर्जी के लक्षण नियंत्रण मे नही है या साथ में कोई अन्य बीमारी जैसे -क्रोनिक किडनी डिसिज, डायबिटीज, क्रोनिक लिवर डिसिज, हाइपेरटेंषन जैसी बीमारी वाले मरीजों में कोरोना होने का ज्यादा जोखिम है। उन्होनें सुझाव दिया कि माइल्ड टू मोडरेट एलर्जी मरीजों को टेली मेडिसिन/टेलीपेथी से ही उपचार किया जाये और उन्होने एलर्जी /अस्थमा के गंभीर रोगियो को क्लीनिक/अस्पताल में मरीज को देखते समय बचाव के विभिन्न तरीके जैसे मरीज का थर्मल स्क्रिनिंग तथा अपोइटमेन्ट के बाद देखना एवं ऐरोसोल जेनरेटिंग प्रेासीजर जैसे- पीएफटी (पल्मोनरी फंक्षन टेस्ट), नेबुलाइजेषन, आदि से बचने पर जोर दिया। उन्होनें इन्हेलर एवं स्पेसर को नेबुलाइजेषन की जगह पर उपयोग करने की सलाह दी। नेबुलाइजेषन की अतिआवष्यकता होने पर नेबुलाईजेषन का प्रयोग खुले स्थान पर जैसे पोर्च, गैराज या एक अलग हवादार कमरे में करें। एलर्जी टेस्टिंग एवं नये मरीजो में बाइलोजिकल एजेंट जैसे ओमेलीजुमाब को देने के लिये डा0 सूर्यकान्त ने मना किया।
    डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि नेबुलाइजर एवं स्पेसर को हर बार उपयोग करने के बाद पानी व साबुन या लिक्विड डिटरजेंट से साफ करें, जिससे कोविड संक्रमण से बचाव किया जा सके। उन्होनें डिजिटल इन्हेलर, स्मार्ट थर्मोमीटर, एवं स्मार्ट स्पाईरोमीटरी का प्रयोग करने की सलाह दी। शारीरिक इम्यूनिटी बढाने के लिए उचित भोजन, अच्छी नींद, भाप लेना, धूम्रपान से बचाव एवं नियमित रूप से योग/प्राणायाम करने के लिए बताया।
    इसी के साथ उन्होने कोविड-19 से बचाव के लिए शारीरिक दूरी, एलर्जन से बचाव, फेस मास्क का प्रयोग, बार-बार हाथों को साबुन से 30 सेकेण्ड तक धुलना, तथा बार-बार नाक, कान, आंख एवं मुंह को न छूना भी बाताया।

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