जैन धर्म की प्राचीन शिक्षा में निहित है करोना से बचाव का रास्ता: मैक्सवेल

    0
    349

    आज पूरे विश्व में कोरोना वायरस 19 एक महामारी का रूप ले चुका है ।इस महामारी से बचने के लिए विश्व संगठनों द्वारा मुंह पर मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। मै बताना चाहता हूं कि हमारे देश के बहुत पुराने और कर्मकांड पर विश्वास करने वाले जैन धर्म के स्थानकवासी एवं तेरापंथी साधु मुख पर पट्टी बांधते हैं। जिसको ( मुखपटित्त) कहते हैं। उनकी धारणा है कि मुख से आने-जाने वाली श्वास से अत्यंत सूक्ष्मजीव-जंतुओ का घात होता है ,अहिंसा व्रत के पालन के लिए यह अनिवार्य है। जैन के मुंह पर मु्खपटित्त बांधने और हमारे द्वारा मुंह पर मास्क बांधने में फ़र्क यह है कि जैन लोग सूक्ष्मजीव-जंतुओं को बचाने के लिए मुंह पर मुखपटित्त बांधते है और हमने अपने जीवन को बचाने के लिए मुंह पर मास्क पहना ।आज हमारे देश के जैन धर्म की यह शिक्षा पूरे विश्व में हमारे देश का गौरव बढ़ाती है ।
    हमारी इस शिक्षा ने पूरे विश्व के मानव जाति को बचाने में अपना योगदान दिया है।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here