जन्नतुल बक़ीअ के पुनर्निर्माण तक सिर्फ विरोध नहीं मुकम्मल बायकॉट ज़रूरी। सैय्यद तक़वी

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    1/6/2020

    आज अंतरराष्ट्रीय शोक दिवस है। इस अवसर पर हर साल पूरे संसार में जगह जगह सऊदी दूतावास के सामने सैकड़ों लोगों विरोध प्रदर्शन में भाग लेकर आले सऊद शासन की नीतियों की निंदा की जाती रही है। मैं भी मलऊन के इस बेहूदा हरकत की निंदा करता हूं।
    लाकडाउन की वजह से इस साल एहतेजाज की तस्वीर बदली है। इस वर्ष सोशल मीडिया के माध्यम से और लाइव विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।
    जन्नतुल बक़ीअ कि तबाही अफ़सोसनाक है। बीती हुई सदी में 8 शव्वालुलमुकर्रम ,1345 (April 21, )1925 को आले सऊद ने बनी उमय्या व बनी अब्बास के क़दम से क़दम मिलाते हुए ख़ानदाने नबुव्वत व इसमत के लाल व गोहर की क़ब्रों को वीरान करके अपनी दुश्मनी का सबूत दिया जो सदियों से उसके सीनों में थी। आज आले मुहम्मद की क़ब्रों पर साया नहीं है जबकि उनके सदके़ में मिलने वाली नेमतों से ये यहूदी नुमा सऊदी अपने महलों में मज़े उड़ा रहे हैं।
    1925 में इस्लामी कैलेंडर के शव्वाल महीने की 8 तारीख़ को मुसलमानों के दूसरे सबसे पवित्र शहर मदीने में पैग़म्बरे इस्लाम (स अ) की बेटी हज़रत फ़ातेमा ज़हरा(स अ) के पवित्र मज़ार समेत सहाबा और इस्लाम की कई विशिष्ट हस्तियों की क़ब्रों को ध्वस्त कर दिया गया था।
    सऊदी शासन और कट्टरपंथी वहाबी समुदाय द्वारा अंजाम दी गई इस्लाम विरोधी इस दुःखद घटना के बाद से दुनिया भर के मुसलमान विशेष रूप से शिया मुसलमान 8 शव्वाल को शोक दिवस के रूप में मनाते हैं और विरोध प्रदर्शनों का आयोजन करके आले सऊद शासन से हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स अ) के रौज़े के पुनर्निर्माण की मांग करते हैं।

    इसी सिलसिले में मौलाना यासूब अब्बास साहब की ओर से सऊदी अरब हुकूमत के विरोध में जनन्तुल बकी के कब्रिस्तान मदीने में रसूल-ए-इस्लाम की इकलौती बेटी जनाबे फातिमा और इमामों के रौजों को ध्वस्त किये जाने के विरोध में आज एक विशाल विरोध-प्रदर्शन आनलाइन किया जा रहा है।
    मौलाना यासूब अब्बास ने पिछले साल अपने भाषण में कहा था कि इस्लाम धर्म किसी पर जबर्दस्ती अत्याचार नहीं करता, सऊदी अरब मुसलमानों पर जबर्दस्ती कर अपना दृष्टिकोण दूसरे मुसलमानों पर लादना चाहता है। मौलाना ने सऊदी अरब हुकूमत से मांग की थी कि या तो जन्नतुल बकी का निर्माण करायें या हमकों इजाजत दें, हम वहां जाकर पुनर्निमाण करें। आज एक बार फिर वही मांग दोहराई जा रही है।
    यह विरोध प्रदर्शन जरूरी भी है। इससे पता चलता है कि क़ौम ज़िंदा है। मगर शायद सिर्फ एक दिन नहीं हर शहर में कुछ मख़्सूस जगह तलाश की जाये जहां हमेशा विरोध प्रकट करता हुआ बोर्ड लगा हो। और हर महीने की आठ तारीख को इस स्याह दिन को याद करके मजलिस का आयोजन किया जाये और प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री को ज्ञापन दिया जाये।
    हमारी यही मांग है कि सऊदी अरब में जारी बड़े पैमाने पर मानव एवं धार्मिक अधिकारों के हनन को तुरंत रोका जाए। संयुक्त राष्ट्र एवं अंतरराष्ट्रीय न्यायालय मूकदर्शक ना बने रहें।
    मेरी मांग है कि मुसलमानों के सबसे पवित्र शहरों मक्का और मदीना समेत पूरे अरब प्रायद्वीप में इस्लामी धरोहरों को सुरक्षित रखे जाने पर बल दिया जाए और जन्नतुल बक़ीअ क़ब्रिस्तान समेत जिन पवित्र स्थलों को आले सऊद शासन ने ध्वस्त करके आम मुसलमानो की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है, उनका तुरंत पुनर्निर्माण किया जाए।
    सऊदी अरब में मानवाधिकारों की स्थिति पर पूरी दुनिया को चिंता ज़ाहिर करनी चाहिए और विशेषकर हमारी भारत सरकार को सऊदी हुकूमत की मानवता के खिलाफ जारी कार्यवाही का विरोध करना चाहिए।
    आले सऊद मुर्दाबाद।

    सैय्यद एम अली तक़वी
    syedtaqvi12@gmail.com

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