गांधी जयंती पर गांधी विचारों की हत्या

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आज पूरे देश में गांधी जयंती मनाई गई। गांधी उस शख्स और हस्ती का नाम है जिसको पूरी दुनिया मानती है। गांधीजी के सोच और विचारों पर पूरी दुनिया अमल करती है।
गांधी ने पूरे देश को हिंसा के मार्ग पर चलना सिखाया। गांधी जी ने बताया कि अहिंसा में बहुत शक्ति और ताकत होती है हिंसा किसी चीज का इलाज नहीं है।
लेकिन गांधी के इस देश में पिछले कुछ दिनों से जो चल रहा है वह गांधी का रास्ता तो बिल्कुल नहीं दिखाई देता है। हर तरफ जोर जबरदस्ती अन्याय भ्रष्टाचार दिखाई दे रहा है।
क्या सरकार और सरकार में बैठे लोग और अफसरों को गांधी जयंती मनाने का हक है क्योंकि गांधी जयंती के अवसर पर कई ऐसी घटनाएं सामने आई जो हृदय विदारक थी हाथरस पीड़िता के घर को और घरवालों को जिस तरीके से पुलिस ने घेर रखा है और किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है यह बहुत कष्टदायक है क्या गांधी जी ने यही सिखाया था तमाम मीडिया कर्मी उस परिवार से मिलना चाहते हैं लेकिन पुलिस प्रशासन मिलने नहीं दे रहा है यहां तक कि पीड़िता के भाई ने इंडिया टीवी को मैसेज करके कहा कि उनसे मिलना चाहता है लेकिन फिर भी इंडिया टीवी के एक दो नहीं चार चार पत्रकारों के उनके गांव पहुंचने पर पुलिस वालों ने रोक लिया मिलने नहीं दिया यह कहां की आजादी है। एबीपी न्यूज़ की महिला पत्रकार को रोकना उसके साथ गलत व्यवहार करना धक्का-मुक्की करना क्या लोकतंत्र यही सिखाता है!
लोकतंत्र की हत्या तू उसी वक्त हो गई थी जब पीड़िता लड़कियों को रात में जला दिया जाता है। परिवार के सदस्यों के रहते हुए क्या रात में अंत्येष्टि करना उचित है!
पुलिस प्रशासन पुलिस के लोग इसलिए हैं ताकि वह जनता की रक्षा कर सकें और सरकारी नौकर है इसलिए उनको वर्दी दी गई लेकिन यह वर्दी एक खौफ का रूप ले चुकी है लोगों को इस बात का एहसास नहीं होता कि यह सरकारी कर्मचारी हैं सरकारी नौकर हैं जो जनता की रक्षा के लिए हैं जनता को न्याय दिलाने के लिए हैं बल्कि हर आदमी के अंदर खाकी वर्दी देखते ही डर आ जाता है
यही देश का दुर्भाग्य है।
सरकार प्रशासन मीडिया जनता सब की परिभाषा बदलती चली जा रही है कोई भी अपना दायित्व निभाने के लिए तैयार नहीं है और जिस चीज को अपना दायित्व कह कर वह कर रहे हैं वह पूरी तरह अन्याय है। कोई कुर्सी बचाना चाहता है कोई कुर्सी हासिल करना चाहता है सियासत के अखाड़े में जनता पैरों तले रौंदी जा रही है।
कभी धर्म के नाम पर कभी जात और बिरादरी के नाम पर कभी गरीब और अमीर के नाम पर कभी उच्च और निम्न के नाम पर, कभी सरकारी और प्राइवेट के नाम पर। आखिर कब तक जनता को बेवकूफ बना कर के चला जाएगा और कब तक जनता इसे सहन करती रहेगी कब तक सरकार पुलिस प्रशासन का नकारात्मक प्रयोग करता रहेगा कब तक सरकार अपने आप को पुलिस प्रशासन के पीछे छुपाता रहेगा कब तक सरकार पुलिस प्रशासन को अपनी ढाल बनाती रहेगी?
गांधी के इस देश में अन्याय के वातावरण में न जाने कितने सवाल है जो जनता की निगाहों के सामने घूम रहे हैं लेकिन अफसोस सवालों का जवाब देने वाला फिलहाल कोई नहीं है।
गांधी जयंती मनाने के लिए गांधी के विचारों को अपनाने की जरूरत है उम्मीद है कि गांधी जयंती पर सरकार पुलिस प्रशासन गांधी के विचारों के बारे में सोचने का कष्ट करेंगी।
जयहिंद।

सैय्यद एम अली तक़वी
लखनऊ
syedtaqvi12@gmail.com

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