खुली धमकी के बाद भी अमरीका ने क्यों ईरानी तेलवाहक जहाज़ों को नहीं रोका? रूसी न्यूज़ एजेन्सी ने दिया जवाब

    0
    95

    30/5/2020

    जब ईंधन से भरे ईरान के पांच तेलवाहक जहाज़ वेनेज़ोएला की तरफ बढ़ रहे थे तो अमरीका ने उन्हें रोकने की धमकी देते हुए अपने कई युद्धपोत भी इन तेल वाहक जहाज़ों के रास्ते में भेज दिये।

    यह देख कर बहुत से लोगों को यह विश्वास हो गया था कि अमरीका ईरानी तेल वाहक जहाज़ों को वेनेज़ोएला नहीं पहुंचने देगा। फिर दोनों देशों के अधिकारियों की ओर से जिस तरह के बयान सामने आने लगे उनसे बहुत से लोग सांस रोक कर ईरान व अमरीका के मध्य टकराव का इंतेज़ार करने लगे।

    लेकिन ईरानी तेलवाहक जहाज़, एक के बाद एक वेनेज़ोएला पहुंचने लगे और वहां तेल खाली करने लगे तो फिर अमरीका व ईरान के युद्ध का सपना देखने वालों ने यह कहना शुरु कर दिया कि वास्तव में अमरीका व ईरान के बीच पहले से ही समझौता हो गया था इस लिए ईरानी तेल वाहक जहाज़ बड़े आराम से वेनेज़ोएला पहुंच गये। यहां तक कि एक टीवी डिबेट में जिसमें मैं भी शामिल था, ट्रम्प के एक सलाहकार ने कहा कि अमरीका ने मानवीय भावना के अंतर्गत ईंधन को वेनेज़ोएला जाने से नहीं रोका। मैंने मज़ाक़ में कहा कि क्या आप को खुद इस बात पर विश्वास है जो आप दूसरों से यह चाह रहे हैं कि वह समझें कि ट्रम्प में मानवता की कोई झलक है, वह चुप हो गये क्योंकि उन्हें खुद ही अपनी बात पर विश्वास नही था।

    हमें तो यह नहीं लगता कि ईरान, वेनेज़ोएला की मदद के लिए अमरीका से बात चीत करेगा क्योंकि दोनों देशों के बीच में इससे भी कई गुना अधिक महत्वपूर्ण मुद्दें हैं इस लिए अगर बात होगी तो उन विषयों पर होगी न कि वेनेज़ोएला की मदद के विषय पर।

    अगर यह मान लिया जाए कि अमरीका ने मानवता के नाते वेनेज़ोएला जाने वाले इन तेल वाहक जहाज़ों को नहीं रोका तो इससे अधिक सरल यह था कि अमरीका मानवता के नाते उन अमरीकी कंपनियों को ईंधन पहुंचाने की अनुमति दे देता जो अब तक वेनेज़ोएला ईंधन पहुंचा रही थीं।

    अस्ल में अमरीका और वेनेज़ोएला के बीच अधिक मतभेद की वजह यह है कि इस देश के दिंवगत राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ ने तेल का राष्ट्रीयकरण कर लिया जिसकी वजह से अमरीकी कंपनियों की तरफ से वेनेज़ोएला के तेल की लूट खत्म हो गयी जिस पर अमरीका को काफी गुस्सा आया। 70 साल पहले ईरान में मुसद्दिक सरकार ने यही काम किया था और उस वक्त ब्रिटेन और अमरीका ने ईरान के साथ जो काम किया था वही उन्होंने वेनेज़ोएला के साथ किया अर्थात उसके तेल का बहिष्कार कर दिया और वेनेज़ोएला पर प्रतिबंध लगा दिये।

    अस्ल में वेनेज़ोएला में तेल के राष्ट्रीयकरण की वजह से अमरीकी कंपनियों और अमरीका को कई सौ अरब डालर का नुक़सान हो गया, सब को मालूम है कि ट्रम्प एक व्यापारी हैं और पैसा ही उनके लिए सब कुछ है।

    हमारे ख्याल में ईरान का मकसद अपनी ही तरह अमरीकी प्रतिबंधों के शिकार एक देश की मदद करना था, इसके अलावा भी ईरान से वेनेज़ोएला तक ईंधन पहुंचने के इस ईरानी अभियान के कुछ अन्य उद्देश्य भी हो सकते हैं।

    ईरानियों को बहुत अच्छी तरह से मालूम था कि जिब्राल्टर स्ट्रेट में ईरानी तेलवाहक जहाज़ को पकड़े जाने के बाद जब आईआरजीसी ने ब्रिटिश जहाज़ को पकड़ा था तो उसी समय सब को यह पता चल गया था कि किसी ईरानी जहाज़ को पकड़ने का अंजाम क्या हो सकता है यही वजह है कि ईरान ने निश्चिंत होकर अपने तेल वाहक जहाज़ वेनेज़ोएला भेजे।
    ईरानी तेलवाहक जहाज़ों ने अपना सफर शुरु करते हुए जीपीएस चला दिया और अपना गंतव्य भी बता दिया और वेनेज़ोएला पहुंचने के लिए वह रास्ता अपनाया जिस पर अमरीका और उसके घटकों का वर्चस्व है इस तरह स ईरान ने अमरीका को खुल कर चुनौती दी।
    ईरान से चलकर वेनेज़ोएला पहुंचने में 70 दिन का समय लगा और इस दौरान निश्चित रूप से अमरीका ने अपने कई मित्र देशों और घटकों से मांग की होगी कि वह इन जहाज़ों को अपने समुद्री क्षेत्रों से गुज़रने की अनुमति न दें लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि अमरीका के किसी भी मित्र देश ने ईरानी जहाज़ों को रोकने की अमरीकी मांग स्वीकार नहीं की। ईरानी जहाज़ हुरमुज़ स्ट्रेट से होते हुए बाबुलमंदब स्ट्रेट तक गये और वहां से स्वेज चैनल से गुज़रते हुए जिब्राल्टर स्ट्रेट भी गये और वहां से वेनज़ोएला पहुंचे। इस पूरे रास्ते में अमरीका अपने दोस्तों की मदद से कहीं भी ईरानी जहाज़ों को रुकवा सकता था और यह उसके लिए टकराव से बहुत आसान होता मगर सच्चाई यह है कि उसके किसी मित्र देश ने उसकी यह मांग स्वीकार ही नहीं क्योंकि वह इस मामले में अमरीका के साथ सहयोग का अंजाम देख चुके थे और कोई भी देश ब्रिटेन वाले अंजाम को दोहराना नहीं चाहता था।
    यह बिल्कुल साफ है कि ईरानियों का उद्देश्य, दुनिया के सामने यह साबित करना था कि अमरीका जितना दावा करता है उतना भी ताकतवर नहीं है और अगर दुनिया में पस्पर सहयोग हो तो अमरीका जैसे देशों को सुधारा जा सकता है।
    ईरान और वेनेज़ोएला पर संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद की ओर से प्रतिबंध नहीं लगाये गये हैं बल्कि जो भी प्रतिबंध हैं वह अमरीका की ओर से लगाये गये हैं। ईरान और वेनेज़ोएला ने इस तरह से विश्व वासियों को यह संदेश दिया है कि अगर किसी देश पर प्रतिबंध लगाया जाता है वह सारे देश एक दूसरे केस साथ व्यापार कर सकते हैं और उन्हें अमरीका भी नहीं रोक सकता। अब हालात यह हैं कि अमरीका ने जिन जिन देशों पर प्रतिबंध लगाए हैं वह सब मिल कर एक आर्थिक ध्रुव बना रहे हैं।
    अमरीकियों को अधिकार है कि वह अपने लिए कानून बनाएं, किसी को उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं लेकिन उन्हें भी यह अधिकार नहीं है कि वह दूसरों की ज़िम्मेदारियों का निर्धारण करें और धमकी दें या अपने क़ानून दूसरों पर थोपें।
    अमरीकियों को यह अंदाज़ा हो गया था कि ईरानी तेलवाहक जहाज़ों को रोकना एक अंतरराष्ट्रीय अपराध होगा और ईरान इस बारे में अमरीका पर मुक़द्दमा दायर कर सकता है इसी तरह ईरान को एक बहाना मिल जाएगा जिसे इस्तेमाल करके वह फार्स की खाड़ी में अमरीकी जहाज़ों को रोक लेगा। ज़ाहिर सी बात है अमरीकी यह नहीं चाहते थे कि ईरान के साथ इस प्रकार का कोई टकराव शुरु करें क्योंकि इस तरह के टकराव का उन्हें अधिक नुकसान होता और ईरान के पास खोने के लिए कुछ नहीं था।
    इस लिए यह कहा जा सकता है कि जो कुछ हुआ उसकी अस्ल वजह, अमरीकियों के सामने ईरानियों की हिम्मत थी और पर्दे के पीछे किसी समझौते वगैरा की कोई बात नहीं थी और इस तरह से ईरान की हिम्मत ने अन्य देशों को भी हिम्मत दी है।
    साभार, स्पूतनिक न्यूज़ एजेन्सी

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here