कोरोना योद्धा सर्टिफिकेट उत्साहवर्धक है।

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    इस वक्त पूरी दुनिया कोरोनावायरस से जूझ रही है सिर्फ भारत देश ही नहीं बल्कि दूसरे बड़े बड़े देश चीन अमेरिका इटली भी कोरोनावायरस से परेशान है। भारत में कोरोना वायरस ने लोगों के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। यह बात अलग है कि अभी तक इसकी कोई दवा सामने नहीं आई है लेकिन जिस प्रकार से कोरोनावायरस की तस्वीर सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में दिखाई जा रही है उससे पता चलता है कि यह एक भयानक वायरस है। कोरोनावायरस से मरने वालों के अंतिम संस्कार की तस्वीरें दिल दहला देने वाली होती है बहुत से ऐसे केसेस भी सामने आए जहां मरने वाले के परिवार के सदस्य भी उसके करीब नहीं आ सके दूर से ही उसके दर्शन करने पड़े ऐसी परिस्थिति में देश में चिकित्सक, चिकित्सा कर्मी, नर्सेज, पुलिसकर्मी और न जाने कैसे-कैसे लोग जो मानव सेवा में लगे हुए उनको कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है और सिर्फ यही नहीं बल्कि अगर लॉक डाउन की तस्वीर देखी जाए तो जो सब्जी बेचने वाले घर के दरवाजे दरवाजे सब्जी का ठेला लेकर पहुंचते थे वह भी एक तरीके से जान पर खेलकर लोगों तक पहुंचा रहे थे।
    भारत में बहुत सी ऐसी संस्थाएं, ट्रस्ट, एनजीओ इत्यादि मौजूद हैं जिन्होंने लाकडाउन के इस सख्त वक्त में जनता की बहुत सेवा की और अब अगर वही संस्थाएं जनता की सेवा करने वालों को कोरोना योद्धा के तौर पर प्रमाण पत्र या प्रशस्ति पत्र प्रदान कर रही हैं तो लोगों को कष्ट क्यों हो रहा है, इस पर एतराज क्यों है?
    आलोचना अच्छी चीज होती है लेकिन आलोचना भी सकारात्मक होनी चाहिए नकारात्मक नहीं अगर आलोचना के अंदर नकारात्मक भाव होगा तो कभी भी चीजें आगे नहीं बढ़ सकती आलोचना हमेशा सकारात्मक भाव के साथ होनी चाहिए।
    वास्तव में अगर देखा जाए तो लॉकडाउन के समय में जब पूरे देश में हर तरफ सन्नाटा था तो सड़कों पर गरीब, भूखे, मजदूरों और लाचार असहाय लोगों की सहायता करने में अगर कोई नजर आ रहा था तो यही समाज सेवी संस्थाएं एनजीओ ट्रस्ट सोसायटी बस इन्हीं के कार्यकर्ता सड़कों पर नजर आ रहे थे। इनको कोई मोटी तनख्वाह या कोई मोटी रकम नहीं दी जा रही थी बल्कि वह सेवा भाव से खिदमत में लगे हुए थे ऐसे में अगर इनकी मेहनत के एवज में एक प्रमाण पत्र व प्रशस्ति पत्र इनको प्रदान कर दिया जाता है तो इनकी उत्साह में बढ़ोतरी होती है ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जिनको पैसे से ज्यादा सम्मान और इज्जत प्यारी होती है। इस लॉक डाउन में जहां सरकार सबसे सहायता मांग रही है विश्व बैंक डब्ल्यूएचओ के अतिरिक्त पीएम केयर फंड तथा तमाम प्रदेशों के मुख्यमंत्री फंड, उद्योगपतियों द्वारा दान, फिल्म स्टारों द्वारा दान, इसके अलावा जनता के द्वारा दान जहां एक तरफ सरकार सबसे दान मानकर इकट्ठा कर रही है वहीं प्रदेश की दूसरी तस्वीर देखिए तो जनता अपने जमा हुए किए गए पैसों को लेकर सड़क पर लोगों के बीच उन्हीं पैसों को बांट कर सहायता प्रदान कर रही है। तो इनको क्यों ना कोरोना योद्धा अवार्ड से सम्मानित किया जाए। यह इसके हकदार हैं।
    भारत एक ऐसा मुल्क है जहां हर क्षेत्र में अवार्ड या प्रमाण पत्र या प्रशस्ति पत्र दिया जाता है यह देश उत्साह से भरा देश है लोगों का उत्साह वर्धन करता है सकारात्मक भावों से जीने वालों का देश है।
    यहां भारत रत्न, पद्म पुरस्कार, पद्म विभूषण, पद्म भूषण
    पद्म श्री जैसे अवार्ड दिए जाते हैं।
    सैन्य क्षेत्रों में परमवीर चक्र, महावीर चक्र, वीर चक्र जैसे पुरस्कार दिए जाते हैं। यहां अशोक चक्र, कीर्ति चक्र , शौर्य चक्र भी है।
    युद्ध/शांति के दौरान सेवा, विशिष्ट सेवा और पराक्रम के लिए सेना मैडल, नौ सेना पदक, वायु सेना पदक,
    सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, युद्ध सेवा पदक, परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, विशिष्ट सेवा पदक दिये जाते हैं।
    नेतृत्व पुरस्कार के अंतर्गत गाँधी शांति पुरस्कार, इंदिरा गाँधी पुरस्कार, साहित्य पुरस्कार के अंतर्गत ज्ञानपीठ पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार, भाषा सम्मान पुरस्कार इत्यादि दिये जाते हैं
    इसके अलावा अनुवाद पुरस्कार, अन्नंद कुँवरस्वामी फ़ेलोशिप, प्रेमचंद्र फ़ेलोशिप, राजीव गाँधी खेल रत्न अवार्ड, द्रोणाचार्य अवार्ड, अर्जुन अवार्ड, ध्यान चंद अवार्ड, राष्ट्रपति पुलिस मैडल, राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार
    भरत अवार्ड, संजय चोपड़ा अवार्ड, गीता चोपड़ा अवार्ड
    जीवन रक्षक पदक श्रृंखला अवार्ड, सर्वोत्तम जीवन रक्षक पदक, उत्तम जीवन रक्षक पदक, जीवन रक्षक पदक जैसे उपहार, पुरस्कार मौजूद हैं।
    ऐसे में अगर भारत देश की संस्था ,एनजीओ ,ट्रस्ट करोना के कष्ट भरे समय में सेवा करने वालों को प्रमाण पत्र या प्रशस्ति पत्र दे रही है तो ये उनके लिए उत्साह वर्धन का काम करेगा।
    भारत देश एक ऐसा देश है जो सबका सम्मान करता है एक लकड़ी के टुकड़े से एक गेंद पर प्रहार करके सचिन तेंदुलकर बनने वाले का भी सम्मान करता है एक लकड़ी की बांसुरी बजाने वाले उस्ताद का भी सम्मान करता है एक तीर से निशाना लगाने वाले तीरंदाज का भी सम्मान करता है। कलम चला कर किताब लिखने वाले का भी सम्मान करता है पिक्चर बना करके जनता का मनोरंजन करने वालों का भी सम्मान किया जाता है। यह वह देश है जहां अपने ख्यालों को कलम के जरिए कागज पर उतारने वालों का भी सम्मान किया जाता। रंगों में ब्रश डुबो करके आकृति बनाने वालों का भी सम्मान किया जाता है। लोगों को अच्छा पकवान और अच्छी रेसिपी बनाकर देने वालों का भी सम्मान किया जाता है। अच्छी तस्वीर खींचने वालों का भी सम्मान किया जाता है। अच्छी आवाज सुनाने वालों का भी सम्मान किया जाता है। क्षेत्र के लोगों को इस देश में सम्मान की नजर से देखा जाता है और सम्मानित किया जाता है शायद इसीलिए हमारा देश एक ऐसे गुलदस्ते की तरह दिखता है जहां हर तरह के रंग और हर तरह के फूल नजर आते हैं।
    ऐसे देश में अगर कोरोनावायरस जैसी महामारी के दौरान सेवा करने वालों को प्रशस्ति पत्र या प्रमाण पत्र दिया जा रहा है तो यह काबिले तारीफ बात है इसका उत्साहवर्धन करना चाहिए नकारात्मक आलोचना नहीं।
    जयहिंद

    सैय्यद एम अली तक़वी
    निदेशक -यूरिट एजुकेशन इंस्टीट्यूट
    syedtaqvi12@gmail.com

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