उत्तर प्रदेश की नई बिजली योजनाएं चीन के भरोसे, आसान नहीं है आत्मनिर्भरता की राह

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    चीन से टकराव के चलते आत्मनिर्भर भारत की बात कही जा रही है लेकिन प्रदेश से चीन का पिंड छूटता नहीं दिखाई दे रहा है। प्रदेश की नई बिजली परियोजनाएं चीन के भरोसे ही चलेंगी। जिन निजी बिजलीघरों से प्रदेश को बिजली मिल रही है उनमें भी चीन के उपकरण लगाए गए हैं।

    केंद्र के निर्देशानुसार प्रदेश के पुराने बिजलीघरों में स्थापित कराए जाने वाले प्रदूषण नियंत्रण संयंत्रों के ठेकों में भी चीनी कंपनियों का दबदबा है। स्मार्ट मीटर समेत चीन से आने वाले अन्य छोटे उपकरणों के इस्तेमाल पर रोक के बावजूद प्रदेश में बिजली के मामले में फिलहाल चीन पर निर्भरता बनी ही रहेगी।

    प्रदेश में इस समय 3960 मेगावाट क्षमता की नई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। पनकी में 660 मेगावाट की इकाई का जिम्मा भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लि. (बीएचईएल) को सौंपा गया है। 1320-1320 मेगावाट की जवाहरपुर व ओबरा ‘सी’ परियोजना कोरिया की कंपनी दुसान व हरदुआगंज में 660 मेगावाट इकाई का काम जापानी कं पनी तोशीबा को मिला है। जवाहरपुर व ओबरा ‘सी’ परियोजना की लागत लगभग 10,500-10,500 करोड़ है जबकि हरदुआगंज की इकाई पर 5600 करोड़ खर्च आने का अनुमान है।

    सूत्रों के अनुसार जवाहरपुर, ओबरा ‘सी’ व हरदुआगंज की इकाइयों में चीन से मंगाए गए उपकरण लगाए जा रहे हैं। इससे भविष्य में भी इनकी चीन पर निर्भरता बनी रहेगी। इकाइयों में लगाए जाने वाले इंडक्टेड ड्राफ्ट फैन, फोर्सड् ड्राफ्ट फैन, प्राइमरी एयर फैन व बॉयलर टूयूब जैसे बड़े उपकरण चीन निर्मित हैं। वहीं, बीएचईएल पनकी की इकाई में खुद के बनाए गए स्वदेसी उपकरणों का इस्तेमाल कर रहा है।

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