ईद मिलादुन नबी मनाना हज़रत इब्राहीम की सुन्नतः सै. नूरानी अशरफ किछौछवी

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लखनऊ 30 अक्टूबर, 2020। आॅल इण्डिया मोहम्मदी मिशन के प्रमुख प्रवक्ता सैयद जुनैद अशरफ किछौछवी ने बताया कि मोहम्मदी मिशन के तत्वाधान में आयोजित जश्ने ईद मिलादुन नबी के बारवें दिन मिशन के अध्यक्ष हज़रत सैयद अयूब अशरफ किछौछवी ने ईद मिलादुन नबी पर लोगों का मुबारकबाद पेश करते हुए कहा कि ईद मिलादुन नबी शरीफ सैकड़ों साल से अहले सुन्नत वल जमात मनाता चला आ रहा है। इस साल कोविड-19 की वजह से हमने जुलूसे मोहम्मदी नहीं निकाल सके लेकिन मुसलमानों अफसोस की कोई बात नहीं इंशाअल्लाह आइंदा साल बहुत बेहतर तरीके से निकालेगें। जुलूस न निकालकर भी हमने इसलामी फ्रिक को ही आगे बढ़ाया क्योंकि अगर इस वायरस से हमारे रसूल के किसी भी आशिक को यह मर्ज खुदा न खास्ता लग जाता है, तो हमारे मिशन को धक्का लगता, इसलाम किसी परेशानी खत्म करने का नाम है न कि बढ़ाने का। इसलाम का मकसद अमीर व गरीब की दूरियांे को पाटना है। जिस तरह मस्जिद में चाहे अमीर हो या गरीब सब के सब एक ही सफ में खड़े हो जाते हैं। मस्जिद नबवी, मस्जिदे खाने काबा, या हम घरों में कुरान ख्वानी या कोई भी मज़हबी प्रोग्राम होे वहां पर कोई अमीर-गरीब नहीं होता है। दीन मंे कोई अमीर गरीब नहीं होता है। जब हम दुनिया की बात करते है तो वहा अमीर भी होता है और गरीब भी, ओहदेदारे भी होता है और मज़दूर भी होता है। यही फरक दीन और दुनिया का है। जब हम दीन की बात करते हैं तो सबको साथ लेकर चलने की बात करते हैं। मगर जब हम दुनिया की बात करते हैं इसी बात को खत्म किया है हमारे नबी ने। इस मौके पर ताजुल उलमा सैयद नूरानी मियाॅ अशरफी जिलानी फरमाया नबी का मिलाद हमने बाद में मनाया सबसे पहले अल्लाह ने मनाया जब अल्लाह सारे नबीयों की रूह की तकलीक की तो सब रूहो को इकट्ठा किया और हमारे रसूल के बारे में बताया और जब हज़रत इब्राहीम ने काबा की तामीर की तो उन्होंने दुआ में अपनी नसल में हुजूर सल्ललाहों अलैहि वसल्लम के पैदा होने की दुआ मांगी जो अल्लाह ने कुबुल की। खतीेबे अहले बैत सैयद तलहा अशरफ किछौछवी ने कहा कि ईद मिलाद मनाने के मकसद सिर्फ जलसा नहीं करना बल्कि अपने नबी की तालीम पर चलना भी है। सच्चा आशिक वही है जो नबी की मानने। यानि उनके रास्ते पर चले, हक को हक कहे, सच्चों की तकलीद करे, माँ-बाप, बीवी बच्चों से मोहब्बत करें, पड़ोसियों का ख्याल करें अपने बच्चों को ईलम दिलवायें, फराएज़ की तकमील करवायें, घर व बाहर मोहब्बत का माहौल कायम करें। प्रोग्राम का आगाज़ मौलाना सैयद हुसैन अशरफ ने तिलावते कुरआन पाक से किया, मौलाना सैयद समदानी अशरफ व मोहम्मद फैज़ ने नात व मनकबत के शेर पढ़े। इस मौके पर गाजीए दौरा सैयद कासिम अशरफ, शैखुल इस्लाम के जानशीन सैयद हमज़ा अशरफ, मिशन यूथ के सदर सैयद अहमद मियाॅ, सैयद शाहीद अशरफ, नियाज़ कादीर, मोहम्मद ताज, मोहम्मद शमीम वगैरह मौजूद थे। प्रोग्राम मंे कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन किया गया।

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