ईदुल अज़हा को लेकर मुस्लिम समुदाय में असमंजस बरक़रार गाइड लाइन का इन्तिज़ार

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    ताहिर हुसैन हाशमी
    लखनऊ। पूरे विश्व मे फैली वैश्विक महामारी कोविड 19 कोरोना वायरस जैसी खतरनाक बीमारी को देखते हुए अबकी बार ईद उल अजहा ( ईद ए क़ुरबा) के मौके पर शायद पहले की तरह से बकरों के बाज़ार गुलज़ार न हो सके इस लिए इस बार बकरा वयापारियो ने अभी से यूपी सहित देश के ज्यादातर राज्यों में बकरों की ऑनलाइन बिक्री शुरू की गई है । आन लाइन बिक्री में बकरे की नस्ल और वजन के हिसाब से दामो की घोषणा कर ग्रहको को रिझाने का काम भी शुरू हो गया है। कुछ वयापारियो ने आन लाइन बकरे की कीमत की घोषणा लड़ते हुए 350 से लेकर 450 रुपए किलो तक दाम भी तय कर दिए है। ईद उल अज़हा का चांद 22 जुलाई को देखा जाएगा चांद के मुताबिक ईदुल अज़हा 31 जुलाई या 1 अगस्त को मनाई जा सकती है । कोरोना वायरस की वजह से इस बार बकरा मंडी लगने की सम्भावनाए न के बराबर ही है वैसे भी 31 जुलाई तक सरकार ने सप्ताह में 2 दिन के सख्त लॉक डाउन का आदेश दिया है। कोरोना संकट के बीच पड़ रहे ईदुल अज़हा के त्योहार को लेकर फिलहाल सरकार की तरफ से अभी तक कोई गाइडलाइन जारी नही की गई है और न ही किसी मुस्लिम धर्मगुरु की तरफ से कोई गाइड लाइन जारी हुई है। जिसकी वजह से मुस्लिम समुदाय असमंजस की स्थिति में है। मौजूदा हालात को देखते हुए बकरों की आन लाइन बिक्री का ये कारोबार बकरा व्यपारियो के लिए फायदे का कारोबार साबित हो सकता है । वैसे इस सिलसिले में ईदगाह ऐशबाग के इमाम खालिद रशीद फिरंगी महली ने भी प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर सरकार द्वारा दी गई गाइड लाइन तथा सामाजिक दूरी को ध्यान में रखते हुए ईद उल अज़हा पर बकरा मंडी लगाने की बात कही थी। प्राप्त सूचना अनुसार ऑनलाइन बकरे की खरीदारी करने के लिए खरीदार को 20% एडवांस पैसा जमा करना होगा बाकी की शेष धनराशि बकरा लेने पर देना होगी । बकरे का ऑनलाइन कारोबार करने वाले लोगों ने बकरे की घर तक डिलीवरी करने की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही है ताकि लोगों को इस बार कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी के कारण बकरा खरीदने में लोगो को परेशानी ना हो औऱ कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी से बचा जा सके और समाजिक दूरी का भी पूरी तरह से पालन हो सके। हालांकि ईदुल अज़हा पर बकरे की कुर्बानी के साथ ही भैंस की कुर्बानी भी की जाती है । बकरे की कुर्बानी करना गरीब के लिए भारी पड़ता है इस लिए तमाम लोग भैंस की कुर्बानी में हिस्सा लेलेते है एक बकरे की कुर्बानी एक व्यक्ति के नाम से हो सकती है जबकि एक भैंस में 7 लोग हिस्सा ले सकते है। बकरे की न्यूनतम कीमत की अगर बात की जाए तो कुर्बानी के बकरा आज के दौर में 5 हज़ार से कम मिलना मुश्किल है जबकि भैंस की कुर्बानी के एक हिस्से के लिए अधिकतम 2 हज़ार रुपए ही खर्च होते है। कोरोना काल की भेंट वैसे तो लगभग सभी धर्मों के कई त्योहार चढ़ चुके है । कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए यही माना जा रहा है कि साल 2020 में पड़ने वाले सभी त्योहार कोरोना से प्रभावित होंगे हालांकि अभी तक तो यही देखने को मिला है कि भारत मे सभी धर्मों के लोगो ने त्योहारों को सरकारी गाइड लाइन के अनुसार ही मनाया है। अब देखने वाली बात ये होगी कि ईदुल अज़हा के त्योहार को सादगी के साथ मनाए जाने के लिए सरकार और धरगुरुओ कि तरफ से किस तरह की गाइड लाइन जारी होती है। वैसे अभी तक तो लोगो लो आन लाइन बकरों की बिक्री आसान नज़र आ रही है लेकिन ये बिक्री कितनी पारदर्शी और कितनी आसान होगी ये तो ईदुल अज़हा का त्योहार करीब आने पर ही पता चलेगा फिलहाल ईदुल अज़हा के त्योहार में दो सप्ताह का समय बाकी है। वैसे लोगों का मानना है कि मसत भी यही कहता है कि अगर कोई महामारी है तो उससे बचने के लिए त्यौहार को सादगी से मनाने में कोई हर्ज नहीं यही माना जा रहा है कि इस बाहर ईद उल अजहा भी पूरी तरह की से सादगी के साथ मनाई जाएगी।

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