इसराइल से समझौता कर सऊदी अरब ने मुसलमानों को धोखा दिया है

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    ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने एक भाषण में कहा है कि संयुक्त अरब अमीरात ने इसराइल के साथ समझौता कर भारी ग़लती की है.यूएई पर निशाना साधते हुए अपने आक्रामक भाषण में रूहानी ने कहा कि यूएई ने धोखा दिया है.

    वहीं ईरान के अख़बार कायहान के मुख्य संपादक ने कहा है, ”यूएई ने अपने आप को विरोध का वैध निशाना बना लिया है.”

    कायहान के संपादक की नियुक्ति ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातोल्लाह ख़मेनई ही करते हैं.

    टीवी पर दिए अपने भाषण में रूहानी ने यूएई को चेतावनी देते हुए कहा है कि मध्य पूर्व में इसराइल के पैर मज़बूत करने के ख़राब परिणाम होंगे.उन्होंने कहा, यूएई सावधान रहें. उन्होंने बहुत बड़ी ग़लती कर दी है. एक विश्वासघाती क़दम उठाया है. हमें उम्मीद है कि उन्हें अपनी ग़लती का आभास होगा और वो ये ग़लत रास्ता छोड़ देंगे.”

    वहीं पहले पन्ने पर प्रकाशित टिप्पणी में कायहान अख़बार ने कहा है, ”संयुक्त अरब अमीरात ने फ़लस्तीन के लोगों को बड़ा धोखा दिया है. ये धोखा इस छोटे से अमीर देश को जो अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर है ‘रेज़िस्टेंस’ का वैध निशाना बना देगा. रूहानी ने ये भी कहा कि इस समझौते का मक़सद नवंबर में होने जा रहे अमरीकी चुनावों में राष्ट्रपति ट्रंप की उम्मीदवारी को मज़बूत करना है. उन्होंने कहा कि इसलिए ही इस समझौते की घोषणा वॉशिंगटन से की गई है.

    रूहानी ने कहा, ”ये समझौता अब क्यों हुआ है? अगर ये समझौता ग़लत नहीं है तो फिर इसकी घोषणा एक तीसरे देश में क्यों हुई है?

    वो भी अमरीका में?

    ताकि वॉशिंगटन में बैठा वो व्यक्ति वोट बटोर सके. आपने अपने देश को, अपने लोगों को, मुसलमानों को और अरब दुनिया को धोखा दिया?”

    ईरान के शक्तिशाली सैन्य संगठन रिवॉल्युश्नरी गार्ड्स कोर ने एक बयान में कहा है कि यूएई-इसराइल समझौते के बाद ‘बच्चों की हत्या करने वाले यहूदी शासन के विनाश की प्रक्रिया और तेज़ हो जाएगी.’

    वहीं एक बायन में संयुक्त अरब अमीरात ने कहा है कि इसराइल के साथ उसके समझौते का मक़सद ईरान को जवाब देना नहीं है.

     

     

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