अब दबाव बनाकर वसूली जा रही है फीस।

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लॉकडाउन में बहुत सी बातें निकल कर के सामने आई। लेकिन एक खास बात यह सामने आई है कि लोगों में इंसानियत खत्म हो गई खासकर उन लोगों में जो अपनी जिंदगी को व्यवसाय समझ रहे हैं।
शिक्षा के क्षेत्र को सरकार ने वैसे ही बहुत ज्यादा कमजोर कर दिया क्योंकि शिक्षा के ऊपर कोई ध्यान नहीं दिया गया। सारे शिक्षण संस्थान, प्राइवेट कोचिंग संस्थान, कंप्यूटर सेंटर बंद होने से लाखों ऐसे लोग हैं जो बेरोजगार हो गए हैं जिनको खाने के लाले लग गए।
मगर जो प्राइवेट बड़े स्कूल (जो राजनैतिक और धार्मिक बड़े लोगों के हैं) शहर में चल रहे हैं वहां पर व्यवसाय का धंधा चालू है। ऑनलाइन के नाम पर अभिभावकों को पूरी तरह बेवकूफ बनाया जा रहा है जबकि ऑनलाइन शिक्षा का कोई मतलब नहीं है। जूम एप्प और व्हाट्सएप के जरिए शिक्षा बिल्कुल नहीं प्राप्त की जा सकती यह सत्य है उसको सब को मानना चाहिए जबरदस्ती दिखावा करने से कोई फायदा नहीं। क्लास 1से 8 तक के बच्चों को तो बिल्कुल नहीं समझ में आता कि ऑनलाइन क्लास कैसे हो रही है और क्या हो रहा है? ऑनलाइन शिक्षा कहते किसको है यह कैसे दी जाती है यह किसी को पता ही नहीं है। 6 इंच के मोबाइल पर ऑनलाइन शिक्षा नहीं होती। सिर्फ कॉपी और पेस्ट।
मैंने खुद देखा कि अभिभावकों को स्कूल बुलाया जा रहा हैं और उन पर स्कूल प्रधानाचार्य दबाव बना रहे हैं और एप्लीकेशन लिखा कर रखी जा रही कि आप कब तक फीस जमा कर देंगे। उनसे कहा जा रहा है कि आप फीस जमा करें थोड़ी-थोड़ी करके जमा करें लेकिन आपको फीस जमा करनी होगी। परेशानी की बात करने पर प्रधानाचार्य कहते हैं कि परेशानी सिर्फ आप के लिए नहीं है यह तो सबके लिए है। प्रधानाचार्य इंसान ना हो करके एक मशीन है और उसको जो कॉलेज मैनेजमेंट कमेटी ने रटा दिया बस उसको वही बोलना है इंसानी तकलीफ और परेशानियों से उसका कोई लेना-देना नहीं है। ना ही अभिभावकों को फीस में कोई छूट की बात कही जा रही है। जबकि यह होना चाहिए कि अगर ऑनलाइन क्लास चला रहे हैं तो फिर कम से कम 3 महीने की फीस को पूरी तरह माफ किया जाना चाहिए।
स्कूल में प्रधानाचार्य ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे लगता है कि आने वाले अभिभावक जो है वह दो टके का आदमी है या उनका नौकर है। जब प्रधानाचार्य के अंदर यह सभ्यता नहीं है कि अभिभावकों को कैसा सम्मान दिया जाए तो बच्चों को क्या अच्छी शिक्षा देंगे?
अभिभावक की भी कमजोरी है कि वह इतना ज्यादा डरते हैं कुछ बोलने से कुछ कहने से कुछ आवाज उठाने से कि कहीं उनके बच्चे के साथ स्कूल कुछ गलत ना करे। जबकि स्कूल प्रशासन या प्रधानाचार्य किसी की हिम्मत नहीं है कि वह बच्चों के साथ कुछ गलत करने का प्रयास करें।
सरकार ने लॉकडाउन से पैदा होने वाली समस्याओं से उबरने के लिए जनता के लिए सिर्फ तरह-तरह के वादे किए थे चाहे वह स्कूल का क्षेत्र हो या बैंक और लोन का मामला किसी भी तरह की चीजें हो सिर्फ सरकार ने लंबे लंबे वादे किए हुआ कुछ नहीं।
अभिभावक को तो हिम्मत दिखानी होगी मगर अभिभावकों की समस्याओं के बारे में प्रदेश और देश की सरकार को सोचना चाहिए।

सैय्यद एम अली तक़वी
एडिटर इन चीफ, यूरिट न्यूज़
चीफ़ ब्यूरो, दि रिवोल्यूशन न्यूज़
लेखक, खुलासा पोस्ट

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