अब इंसानों के दो ही ग्रुप BH+ और BH–. सैय्यद तक़वी

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जी हां यह बात सही है लेकिन बिल्कुल परेशान होने की जरूरत नहीं है यह दो ब्लड ग्रुप बहुत तेजी के साथ हिंदुस्तान में फैल रहे हैं।
ब्लड ग्रुप को मुख्यतः 4 वर्गों में बांटा गया है जिनके नाम हैं;A, B, AB और O है। रक्त यह का एक वर्गीकरण, एंटीबॉडी की उपस्थिति और अनुपस्थिति पर निर्भर करता है।
लेकिन आज के हालात ने लोगों के ब्लड को दो ग्रुप में बांटा हुआ है बी एच पॉजिटिव और बी एच नेगेटिव । यह वर्गीकरण इंसान की सोच, जरूरत, परिवारिक बैकग्राउंड और बेईमानी/ईमानदारी की उपस्थिति और अनुपस्थिति पर निर्भर करता है। इसमें सबसे खास बात यह है की अधिकतम लोगों का ब्लड ग्रुप बी एच पॉजिटिव है यानी भ्रष्टाचार पॉजिटिव । ऐसे लोग सिर्फ भ्रष्टाचार करने कराने की तलाश में रहते हैं और भ्रष्टाचार के नए-नए तरीके खोजा करते हैं। भ्रष्टाचार निगेटिव लोग कम हैं और बीएच पाज़िटिव का शिकार हैं।
आज जो देश की स्थिति है उसका कारण बीएच पाज़िटिव लोग हैं। पेट्रोल का शतक तक पहुंचना, गैस का हज़ारी गैस होना, सब्सिडी का लुप्त होना, विद्युत चार्ज का आसमान छूना, सड़कों पर गड्ढे होना यह सब बीएच पाज़िटिव लोगों की देन है।
आज जिस युग में हमारा देश जी रहा है वहां बीएच पाज़िटिव लोगों का सम्मान है। वही अतिथि भी हैं और मुख्य अतिथि भी। बीएस नेगेटिव लोगों को इस वक्त नौकर का कार्य दिया गया है। अर्थात जो बीएच पॉजिटिव लोग कहें वह चुपचाप करते रहो उनकी बात मानते रहो आवाज ना उठाओ अगर आवाज उठाओगे तो देशद्रोही कहलाओगे। आवाज उठाने की मिसाल सामने है सीए एनआरसी के खिलाफ आवाज उठाई गई और अब किसान आंदोलन में किसान जो आवाज उठा रहे हैं। क्या हल निकला दोनों का कुछ नहीं क्योंकि इस वक्त हर जगह हर पद पर हर विभाग में बी एच पॉजिटिव लोग अधिक संख्या में मौजूद हैं। जो लोग बी एच नेगेटिव है उनकी आवाज को सुनने वाला कोई नहीं है क्योंकि बी एच पॉजिटिव की विशेषता यह होती है कि वह इंसान से सुनने, देखने और समझने की क्षमता को छीन लेता है। इसके बाद में वह यह समझता है कि हम जो कर रहे हैं वह सही है हिटलर को भी बीएच पॉजिटिव की बीमारी हो गई थी जिसका परिणाम बहुत भयानक निकला।
बी एच पॉजिटिव की विशेषता यह है कि वह इंसान गलत कार्य तो करता ही है साथ ही साथ हिंसक प्रवृत्ति का भी हो जाता है। अर्थात लड़ना लड़ाना जान ले लेना मरवा देना यह सब उसके लिए आम बात हो जाती है। एक सबसे बड़ी विशेषता यह भी होती है कि बी एच पॉजिटिव लोग अपने अंदर डर भी रखते हैं जब उनसे बड़ा कोई ताकतवर सामने आ जाता है तो वह भले ही उनके घर में घुस आए लेकिन वह यही कहते हैं कि नहीं हमारे घर में कोई नहीं घुसा।
कोविड 19 भी बीएच पाज़िटिव लोगों को नहीं रोक पाया। बल्कि इन लोगों के लिए एक नया रास्ता खुल गया। व्यक्तिगत तौर पर एक इंसान ने दूसरे इंसान की मदद की। लेकिन जो बड़ी-बड़ी संस्थाएं बड़े-बड़े ऑर्गेनाइजेशन हैं उन्होंने इस मौके को भी पूरी तरीके से भुना लिया। जरूरत बी एच नेगेटिव तक नहीं पहुंची बल्कि इन लोगों ने इस माध्यम से भी काफी लंबी लंबी डकारे ली। इसमें धार्मिक और सामाजिक सभी संस्थाएं शामिल है।
हां दूसरी तरफ ऐसे धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं एवं आर्गेनाइजेशंस भी हैं जो बीएच नेगेटिव है उन्होंने खुलकर समाज की सेवा की और इंसानियत की मदद की। लेकिन उन्होंने प्रचार नहीं किया।
बहरहाल यह खेल तो चलता रहेगा। बीएच पाज़िटिव हंसता रहेगा और बीएच निगेटिव रोता रहेगा क्योंकि मदारी भी यही और बंदर भी यही। साथी साथ जो डमरु बज रहा है वह भी भी एच पाज़िटिव। अभी एच नेगेटिव वालों का एक ही काम है बस यह सुनते रहे और देखते रहे।
जय हिन्द।

सैय्यद एम अली तक़वी
syedtaqvi12@gmail.com

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