अंजुमन हाए मातमी और मोमिनीन करोना महामरी से बचते हुए चेहलुम इमाम हुसैन की तय्यारिया करें- मौलाना सैफ अब्बास

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01 अक्टूबर 2020 खानदाने इज्तिहाद विद्वान मौलाना सैयद सैफ अब्बास ने जारी अपने एक बयान में कहा कि चेहलुम हजरत सैय्यदु शुहादा में कुछ ही दिन बाकी हैं। इस लिए लोगों और अंजुमनहाए मातमी को चेहलुम के संबंध मे कोरोना महामारी के मददे नज़र अपनी तैयारी पूरी करना चाहिए। मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि जीवन की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अलावा मुल्क के अंदर गाईडलाईन का भी पालन करना होगा।
मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि आशूरा के दिन लाकडाउन था, जिसके कारण मोमेनीन हज़रत फातेमा ज़हरा स0अ0 को उनके लाल पुरसा नही दे पाए लेकिन चेहलुम के अवसर पर हमें अज़ारी मे काई कमी नही करना चाहिए और इस बीमारी से बचते हुए हज़रत फातेमा ज़हरा स0अ0 को उनके लाल पुरसा देना होगा। जैसा कि चेहल्लुम के अवसर पर अंजुमनहाए मातमी अलम बरामद करती है। इस वर्ष धारा 144 के कारण इस वर्ष सड़क पर जुलूस निकलना संभव नहीं है। इसलिए, अंजुमनहाए मातमी को आपस मे एक बैठक करनी चाहिए और चेहलुम के संबंध मे कार्य योजना तैयार करनी चाहिए। मौलाना सैयद सैफ अब्बास ने कहा कि अंजुमनहाए मातमी को यह हमारा सुझाव है कि ऐसे समय में जब 100 लोगों को एक कार्यक्रम के लिए अनुमति दी गई है, तो कर्बला-ए-तालकटोरा जैसी बड़ी धार्मिकस्थल है जिसमें मौला अली का रौज़ा, बकी,हजरत अब्बास का रौज़ा, हजरत जैनब स0अ0 का धार्मिकस्थल हैं, तो विभिन्न स्थानों पर 25-25 लोगों के साथ चार अंजुमन अलग अलग स्थान पर अपने अलम सजा कर नौहा खानी और मातम करें और अलम उठा कर रौज़ए इमाम हुसैन मे बढा दें और हर एक अंजुमन को 45 मिनट का समय दिया जाए इसी समय मे अलम सजा कर अलम बढाया जाए। इसी तरह से  हर 45 मिनट में, चार अंजुमन के 25-25 लोग हज़रत फातेमा ज़हरा स0अ0 को उनके लाल पुरसा पेश करें। इस तरह हम मुल्क के कानून और गाईडलाईन का पालन करेंगें और हमको किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
मौलाना सैयद सैफ अब्बास ने कहा कि अंजुमन-ए-हाय -मातमी चेहलुम से दो दिन पहले एक बैठक आयोजित करें जिसमें कुराआ अंदाज़ी से नंबर चुने जाएं और समय तय किया जाए और सभी अंजुमनों को समय और नंबर दे दिया जाए ताकि वे बिना किसी देरी के करबला तालकटोरा पहुंच कर नौहा और मातम कर सकें। मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि मास्क व सोशल डेसटेनसिंग और अन्य इहतेयात का खयाल रखें और घातक बीमारी से सुरक्षित रहते हुए अपने मौला का चेहलुम करते हुए हज़रत फातेमा ज़हरा स0अ0 को उनके लाल पुरसा पेश करें।

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